Shankaracharya विवाद पर तीर्थ पुरोहित समाज एकजुट, मामले की कड़ी निंदा कर कही बड़ी बात, जानिए क्यों है विरोध
Shankaracharya controversy ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का संगम स्नान किए बिना लौटने की घटना का विवाद बढ़ता जा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के समर्थन में उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहित समाज भी एकजुट हो गए हैं।
तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने इस मामले की कड़ी निंदा कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। बता दें कि प्रयागराज माघ मेले में मौनी आमावस पर्व पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का रथ रोकने पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की हुई।

इसके बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम स्नाम किए बिना लौट गए थे। इसके बाद से इस घटना को लेकर विवाद शुरू हो गया है। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अध्यक्ष और गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ जो अशोभनीय व्यवहार हुआ है उसकी महापंचायत कड़ी निंदा करती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
ब्रह्म कपाल तीर्थ पुरोहित नरेश आनंद नौटियाल ने कहा कि बांग्लादेश की चिंता करने वाले सनातनी भाजपाई ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, वो देश के सच्चे सनातनियों को कतई बरदाश्त नहीं है। उन्होंने कहा कि वे इसका पुरजोर विरोध करते हैं। यह अशोभनीय व्यवहार सनातन का अपमान है।
इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उधर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज मेला प्राधिकरण के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी करके कहा है कि 24 घंटे में स्पष्ट करें और प्रमाण दें कि आप शंकराचार्य हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बाद भी आप अपने नाम के आगे शंकराचार्य लिख रहे हैं जो कि शीर्ष अदालत के आदेश का उल्लंघन है। जिस पर ज्योतिष पीठाधीश्वर श्ंकराचार्य की तरफ से भी जबावी कार्रवाई करने की तैयारी है।












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