Sawan 2023: पाताल भुवनेश्वर मंदिर, यहां छिपा है दुनिया खत्म होने का रहस्य, एक साथ होते हैं चारों धाम के दर्शन
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पाताल भुवनेश्वर मंदिर भी हिंदूओं की आस्था का केंद्र हैं। गंगोलीहाट में पाताल भुवनेश्वर जंगलों के बीच कई भूमिगत गुफ़ाओं का संग्रह है। जिसमें से एक बड़ी गुफ़ा के अंदर शिव जी का मंदिर स्थापित है।
सावन में शिव भक्त भोले नाथ के दर्शन के लिए शिव मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए अवश्य जाते हैं। ऐसे में शिवभक्तों के लिए उत्तराखंड में कई ऐसे शिव के मंदिर हैं जो खास पौराणिक महत्व और जहां कई रहस्य छिपे हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पाताल भुवनेश्वर मंदिर भी हिंदूओं की आस्था का केंद्र हैं। गंगोलीहाट में पाताल भुवनेश्वर जंगलों के बीच कई भूमिगत गुफ़ाओं का संग्रह है। जिसमें से एक बड़ी गुफ़ा के अंदर शिव जी का मंदिर स्थापित है।

पाताल भुवनेश्वर गुफा कई रहस्य और आश्चर्य से कम नहीं है। यह गुफा प्रवेश द्वार से 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसकी खोज आदि जगत गुरु शंकराचार्य ने की थी । पाताल भुवनेश्वर गुफा में केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ के दर्शन भी होते हैं।
मान्यता है कि पाताल भुवनेश्वर के अलावा कोई ऐसा स्थान नहीं है, जहां एकसाथ चारों धाम के दर्शन होते हों। मान्यता है कि इस गुफा में 33 करोड़ देवी-देवताओं ने अपना निवास स्थान बना रखा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि त्रेता युग में सबसे पहले इस गुफा को राजा ऋतूपूर्ण ने देखा था। द्वापर युग में पांडवो ने यह शिवजी के साथ चौपाड़ खेला था और कलयुग में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस गुफा में ताम्बे का एक शिवलिंग स्थापित किया।
पाताल भुवनेश्वर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान शिव ने क्रोध में गणेश जी का सिर धड़ से अलग किया तो मस्तक भगवान शिवजी ने पाताल भुवानेश्वर गुफा में रखा है। इसके साथ ही पाताल भुवनेश्वर गुफा के चारों युगों के प्रतीक रूप में चार पत्थर स्थापित हैं। मान्यता है कि इनमें से एक पत्थर जिसे कलियुग का प्रतीक माना जाता है, वह धीरे.धीरे ऊपर उठ रहा है। यह माना जाता है कि जिस दिन यह कलियुग का प्रतीक पत्थर दीवार से टकरा जायेगा उस दिन कलियुग का अंत हो जाएगा।












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