Sawan 2023: नीलकंठ महादेव मंदिर, यहीं विष ग्रहण करने के कारण शिव कहलाए नीलकंठ
नीलकंठ महादेव मंदिर का अपना खास पौराणिक महत्व भी है। भगवान शिव को समर्पित यह बड़े मंदिरों में से एक हैं। यह मंदिर लगभग 5500 फुट की ऊंचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।
Sawan 2023: Neelkanth Mahadev Temple: 4 जुलाई से भगवान शिव का महीना सावन शुरू होने जा रहा है। सावन में शिव भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार को जल चढ़ा और व्रत रखकर प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही सावन में शिव भक्त शिव के प्राचीन और पौराणिक महत्वों को लिए मंदिरों में जरुर जाना चाहते हैं। ऐसे में शिव भक्तों के लिए सावन में उत्तराखंड का नीलकंठ महादेव मंदिर सबसे खास मंदिर है। जो कि कावंड़ यात्रा का भी अभिन्न अंग है।

नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश से सड़क मार्ग से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नीलकंठ महादेव मंदिर का अपना खास पौराणिक महत्व भी है। भगवान शिव को समर्पित यह बड़े मंदिरों में से एक हैं। यह मंदिर लगभग 5500 फुट की ऊंचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। मुनि की रेती से नीलकंठ महादेव मंदिर सड़क मार्ग से 50 किलोमीटर स्थित है।
मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया था। उसी समय उनकी पत्नी पार्वती ने उनका गला दबाया जिससे विष उनके पेट तक न पहुंचे। इस तरह विष उनके गले में बना रहा। विषपान के बाद विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया था। गला नीला पड़ने के कारण ही उन्हें नीलकंठ नाम से जाना जाता है। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहां भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं।
मंदिर की विशेषता नीलकंठ महादेव मंदिर अत्यन्त मनोहारी मंदिर शिखर के तल पर समुद्र मंथन के दृश्य को चित्रित किया गया है और गर्भ गृह के प्रवेश.द्वार पर एक विशाल पेंटिंग में भगवान शिव को विष पीते हुए भी दिखाया गया है। सामने की पहाड़ी पर शिव की पत्नी, पार्वती जी का मंदिर है।












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