यूक्रेन में पढ़ रहे छात्रों को लेकर केंद्रीय मंत्री के बयान को लेकर शुरू हुआ बवाल, हरीश रावत ने किया हमला

केंद्रीय मंत्री प्रह्रलाद जोशी ने दिया विवादित बयान

देहरादून, 2 मार्च। केंद्रीय मंत्री प्रह्रलाद जोशी के यूक्रेन में पढ़ रहे छात्रों को लेकर दिए बयान को लेकर बवाल मचा हुआ है। केन्द्रीय मंत्री प्रह्रलाद जोशी ने विवादास्पद दावा करते हुए कहा है कि विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 90 प्रतिशत भारतीय छात्र भारत में योग्यता परीक्षा पास करने में विफल रहते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि फिलहाल यह इस विषय पर बहस करने का सही समय नहीं है कि छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने विदेश क्यों जा रहे हैं। जोशी के इस बयान को लेकर कांग्रेस मुखर नजर आ रही है। कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जोशी से इस बयान को लेकर माफी मांगने को कहा है। साथ ही लोगों की भावनाओं के खिलाफ दिया बयान कहा है।

Ruckus started over Union Minister Prahlad Joshis statement regarding students studying in Ukraine, Harish Rawat relpy

मंत्री का दावा, योग्यता परीक्षा पास नहीं कर पाते 90 परसेंट छात्र
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को लाने के लिए सरकार की ओर से लगातार पहल हो रही है। इसके साथ ही राज्य सरकारें भी केन्द्र सरकार की मदद से अपने-अपने प्रदेश के छात्रों को सकुशल वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं। यूक्रेन में भारत के कई छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाते हैं। जिसका कारण यूक्रेन में भारत से कई सस्ती गुना पढ़ाई होना है। जिसके बाद से इसको लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। इधर केन्द्रीय मंत्री प्रह्रलाद जोशी ने एक विवादास्पद बयान देकर मामले को नया मोड़ ला दिया है। केंद्रीय मंत्री का दावा है कि विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 90 प्रतिशत भारतीय छात्र भारत में योग्यता परीक्षा पास करने में विफल रहते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि फिलहाल यह इस विषय पर बहस करने का सही समय नहीं है कि छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने विदेश क्यों जा रहे हैं।
हरीश रावत ने कहा- माफी मांगे जोशी
इस बयान के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जोशी पर हमला किया है। हरीश रावत ने कहा है कि

प्रह्रलाद जोशी जी का बहुत ही कष्ट पहुंचाने वाला बयान, जिसमें उन्होंने कहा है कि यूक्रेन में पढ़ रहे बच्चे जो वहां मेडिकल एजुकेशन लेने के लिए गए हैं वो अक्षम हैं, वो भारत में नीट की परीक्षा भी पास नहीं कर सकते हैं।

हरीश रावत का कहना है​ कि इस समय प्रश्न यह नहीं है कि वो नीट की परीक्षा पास कर सकते हैं या नहीं कर सकते हैं। प्रश्न यह है कि उनकी जिंदगी को बचाने के लिए केंद्र सरकार क्या कदम उठा रही है। रावत ने आगे कहा कि पहले ही आपने बहुत विलंब कर दिया और जब साक्षात उनके सर पर मौत खड़ी है तो आप इस तरीके का बेहयाई पूर्ण बयान देकर भारत के प्रबुद्धजन मानस को कष्ट पहुंचा रहे हैं। उन्होंने मांग ​की कि प्रहलाद जोशी अपने इस बयान के लिए क्षमा मांगे, वो संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते केंद्र सरकार के प्रवक्ता भी हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिन बच्चों की निकासी की व्यवस्था एक माह पहले से प्रारंभ हो जानी चाहिए थी, उनकी आज जिंदगी खतरे में है, तब भी बहुत कम संख्या में उनको बाहर निकाला जा सक रहा है, एक कर्नाटक के विद्यार्थी की जान भी चली गई है। रावत का कहना है​ कि लोग यूक्रेन या बाहर अध्ययन करने इसलिए नहीं जाते हैं कि वो परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सकते हैं, वो इसलिये भी जाते हैं क्योंकि वहां 25-30 लाख रुपये में मेडिकल शिक्षा मिल जाती है और भारत सरकार ने भी उसको मान्यता दे रखी है और भारत में वही शिक्षा उनको डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा रुपया खर्च करके मिल पाती है, यह एक निम्न मध्यम वर्ग परिवार के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की व्यवस्था करना एवरेस्ट चढ़ने जैसा कठिन कार्य है। आप लोगों की बेबसी का मजाक मत उड़ाइये, उस मां का मजाक मत उड़ाइये जो अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए हर पल आंखों में आंसू भरे हुए हैं और वो मां या टेलीविजन को निहार रही है या अखबार खोज रही है कि कब मेरा बेटा, मेरी बेटी यूक्रेन से सकुशल वापस भारत आ जाएंगे। यूक्रेन संकट के कारण पल-पल उत्तराखंड ​ही नहीं पूरे देश के लोगों की नजरें टिकी हुई है। ऐसे में राजनीति भी जमकर होनी लगी है।

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