Uttarakhand: अल्मोड़ा की रोशन बानो क्यों बनी रोशनी, वजह है बेहद चौंकाने वाली
चार साल तक अपनों की प्रताड़ना झेलने के बाद उत्तराखंड के अल्मोड़ा में रानीखेत की रोशन बानो रोशनी बन गई और अब स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाकर अपने हिसाब से जिंदगी जी रही हैं।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में रानीखेत की रोशनी की कहानी सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रही है। रोशनी पहले रोशन बानो थी, जो कि अपनों से परेशान होकर अब रोशनी बन चुकी है। साथ ही ऐसे समाज में रह रही बेटियों के लिए एक मिसाल बन गई है, जो हमेशा अपने साथ हो रहे अन्याय को सहते हुए चुपचाप जिंदगी काटते हैं। लेकिन रोशनी ने हिम्मत नहीं हारी और अपनों के खिलाफ ही आवाज बुलंद कर दी।
2017 में नागरिक चिकित्सालय रानीखेत में बतौर नर्स ज्वाइन किया
रोशनी पहले रोशन बानो थी, जिसे 2012 में बरेली से नर्सिंग का कोर्स करने के बाद हवालबाग ब्लाक में पहली तैनाती मिली। नौकरी के साथ एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा से बीए फिर एमए किया। 2017 में नागरिक चिकित्सालय रानीखेत में बतौर नर्स ज्वाइन किया। रोशन ने अपने साथ पूरे परिवार की देखरेख की। अपने भाई, बहन को भी पढ़ाया, लेकिन परिजन उससे बुरा बर्ताव करने लगे। अपने ही परिजनों से रोशन को हिंसा का सामना करना पड़ा। रोशन ने हिम्मत दिखाकर मकान लेना चाहा, तो परिजनों ने उसको भी बेटे के नाम करने का दबाव बनाया। इतना ही नहीं भाई और पिता ने रोशन को जमकर पीटा। रोशन ने घर से बाहर किराया पर मकान लिया तो परिजनों ने वहां आकर भी रोशन का जीना मुश्किल कर दिया।
सनातन धर्म अपनाने का फैसला लिया
आखिरकार रोशन ने परिजनों से पीछा छुड़ाने के लिए सनातन धर्म अपनाने का फैसला लिया। चार साल तक अपनों की प्रताड़ना झेलने के बाद रोशन बानो रोशनी बन गई और अब स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाकर अपने हिसाब से जिंदगी जी रही हैं। उनका कहना है कि सनातन धर्म में बेटियों की इज्जत की जाती है। रोशनी प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देख रही थी। लेकिन परिवार की परिस्थितियां देखकर कदम पीछे खींच लिए। परिवार के लिए जीना चाहा और अपनों के लिए कुछ करना चाहा लेकिन अपनों ने ही सबसे ज्यादा दर्द दिया तो अब अपनों के लिए अब अपनी पहचान ही छोड़ दी।
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