Uttarakhand: हजारों लोगों के आशियाने बचाने की डबल चुनौती, सबकी निगाहों पर धामी सरकार

हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर बसे हजारों लोग और दूसरी तरफ पर्यटन केन्द्र जोशीमठ में हो रहे भू—धंसाव से हजारों लोगों के सामने अपने आशियाने बचाने की चुनौती है।

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सीएम के तौर पर ये दूसरा कार्यकाल है। अब तक सीएम धामी के सामने प्रदेश के मुद्दों को लेकर जब भी किसी तरह का कोई बड़ा निर्णय लेने की बात सामने आई तो सीएम धामी ने तुरंत जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय लिया। इसी तरह का एक बड़ा मामला पहले कार्यकाल में देवस्थानम बोर्ड को लेकर आया था, तब सीएम धामी ने बोर्ड को भंग करते हुए बड़ा फैसला लिया, लेकिन पहली बार सीएम धामी के सामने डबल चुनौती है। जो कि हजारों लोगों के आशियाने से जुड़ी है। एक तरफ हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर बसे हजारों लोग और दूसरी तरफ पर्यटन केन्द्र जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव से हजारों लोगों के सामने अपने आशियाने बचाने की चुनौती है। इन दोनों मामलों में धामी सरकार कोर्ट और प्रकृति पर निर्भर है। लेकिन आने वाले समय में इन दोनों मामलों में सीएम धामी अपना और अपनी सरकार का क्या स्टैंड लेते हैं। ये बड़ा सवाल है।

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    हल्द्वानी के बनभूलपुरा में सालों से 50 हजार से ज्यादा लोग

    हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध रूप से बने चार हजार से ज्यादा मकानों पर कार्रवाई की प्रशासन ने तैयारी कर ली थी। इस क्षेत्र में सालों से 50 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं। नैनीताल हाईकोर्ट ने रेलवे की 78 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण कर बनाए गए 4365 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल स्टे लगा दिया है। ​धामी सरकार और रेलवे को नोटिस जारी हुआ है। इस क्षेत्र में चार सरकारी स्कूल, 11 निजी स्कूल, एक बैंक, दो ओवरहेड पानी के टैंक, 10 मस्जिद और चार मंदिर हैं, इसके अलावा दुकानें भी हैं, जो दशकों से बनी हैं। इस क्षेत्र में बसे हजारों घर राजनीतिक पार्टियों के लिए मजबूत वोट बैंक रहे हैं।​ ऐसे में सियासत भी जमकर हो रही है। प्रदेश ही नहीं देशभर की सभी सियासी दल राज्य सरकार को घेरने में लगे हैं। इस इलाके में मुस्लिम परिवार ज्यादा है। ऐसे में यह मामला लोगों की परेशानी से ज्यादा धार्मिक केन्द्रीत होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान सामने आया है। धामी ने कहा है कि हमने पहले भी कहा है कि यह रेलवे की जमीन है। हम कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे बढ़ेंगे। ऐसे में अब इस मामले में धामी सरकार का क्या पक्ष रहता है। इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

    20 हजार से भी ज्यादा आबादी वाले जोशीमठ शहर

    बद्रीनाथ, औली, हेमकुंड साहिब जैसे अहम तीर्थाटन और पर्यटन का केन्द्र बिंदु जोशीमठ में लंबे समय से भू-धंसाव की समस्याएं आ रही हैं। हजारों परिवार इससे प्रभावित हो सकते हैं। जिसको लेकर लोग अब सड़कों पर सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग लड़ने का मन बना रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार ने पहले इस मामले पर गंभीरता से नहीं सोचा। इस मामले में लापरवाही दिखाई। अब मकानों, खेतों और जमीनों में लंबी-लंबी दरारें डराने लगी हैं। 20 हजार से भी ज्यादा आबादी वाले जोशीमठ शहर में करीब 2 हजार से ज्यादा लोग इस भू धूसांव से प्रभावित हो रहे हैं। नगर पालिका जोशीमठ नगर में भूधंसाव व दारारों को लेकर सर्वे कराया गया जिसमें सर्वे में 559 मकानों, भूखंड़ों में गहरी, आंशिक दरारें, दर्ज की गई है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने बताया कि नवंबर 2021 में जोशीमठ में भू धंसाव के सबसे पहले संकेत मिले। इसके बाद से लगातार ये मामला बढ़ रहा है। जो कि अब एक जनआंदोलन हो गया है। ​समिति सरकार पर लगातार लापरवाही और अनदेखी का आरोप लगा रही है। हालांकि सीएम धामी का कहना है कि वे हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। एक कमेटी भेजी जा चुकी है। वे खुद भी जोशीमठ जाने की बात कर रहे हैं। लेकिन जिस तरह की भयावह तस्वीरें जोशीमठ से सामने आ रहे है। उससे साफ लग रहा है कि जोशीमठ के हालात भयावह हो रहे हैं। ऐसे में हजारों लोगों के आशियाने बचाने के साथ ही सरकार पर एक ऐसी नगरी को बचाने की जिम्मेदारी है, जो कि उत्तराखंड के लिहाज से अहम है।

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