Uttarakhand: राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण देने के लिए धामी सरकार की ये है तैयारी
क्षैतिज आरक्षण देने के लिए संशोधित विधेयक लाने की तैयारी
उत्तराखंड अपना 22वां स्थापना दिवस मना रहा है। राज्य आंदोलन के लिए लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग लंबे समय से लंबित है। लेकिन धामी सरकार इस पर बड़ा कदम उठाने जा रही है। उत्तराखंड सरकार राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण देने के लिए संशोधित विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। 15 नवंबर के बाद सत्र भी आयोजित होना है। ऐसे में सरकार इस पर होमवर्क में जुटी है।

वर्ष 2016 यह प्रकरण राजभवन में लंबित था
वर्ष 2016 यह प्रकरण राजभवन में लंबित था। 7 साल बाद पिछले माह राजभवन ने इसे लौटा दिया था। जिसे धामी सरकार संशोधन के साथ दोबारा लाने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि संशोधित विधेयक के रूप में इसे कैबिनेट में लाने के बाद इसी बार विधानसभा सत्र में इसे पारित कराकर राजभवन भेजने की तैयारी सरकार कर रही है। वर्ष 2004 में एनडी तिवारी सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों को नौकरी में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के लिए शासनादेश जारी किया था। नैनीताल हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगा दी थी।
वर्ष 2015 में आरक्षण देने संबंधी विधेयक पारित कर राजभवन को भेजा था
2015 में हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए इस आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया। तत्कालीन कांग्रेस की हरीश रावत सरकार ने वर्ष 2015 में विधानसभा में राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी विधेयक पारित कर राजभवन को भेजा था। तब से विधेयक राजभवन में लटका पड़ा था। इसी वर्ष बीते अप्रैल माह में सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर राज्य आंदोलनकारियों का आरक्षण देने की पैरवी की थी। हाईकोर्ट ने यह प्रार्थना पत्र भी अस्वीकार कर दिया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधेयक को लौटाने या इसे स्वीकृति देने का अनुरोध राजभवन से किया था। अब राजभवन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुरोध को स्वीकार कर इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया। साथ में हाईकोर्ट के निर्णय को देखते हुए इस पर विचार करने को कहा है।












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