पीएम मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद पर्यटकों का बढ़ा रुझान,अब तक इतने सैलानी पहुंचे, जानिए क्यों है खास
उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा को लेकर पर्यटकों का रुझान बढ़ा है। अब तक 5000 से अधिक यात्री आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन कर चुके हैं। पीएम नरेंद्र मोदी बीते अक्टूबर में आदि कैलाश के दर्शन किए।
इसके बाद पीएम गूंजी गांव भी गए। पीएम मोदी की आदि कैलाश यात्रा को मानसखंड के पर्यटन से भी जोड़ा गया। इसके पीछे सरकार की मंशा पर्यटकों को आदि कैलाश यात्रा के लिए प्रोत्साहित करना था। जिसके बाद सरकार काफी हद तक इस पहल में सफल हुई।

अब तक जिस संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। उससे साफ है कि आने वाले समय में आदि कैलाश यात्रा बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। इससे इस क्षेत्र का काफी विकास और स्थानीय व्यापार भी बढ़ना तय है। इस बीच आदि कैलाश यात्रा रूट पर होमस्टे से लेकर हर प्रकार के संसाधनों को लाभ हो रहा है। जिस पर अब सरकार भी तेजी से काम कर रही है।
आदि कैलाश जिसे कैलाश के ही बराबर माना जाता है। कैलाश मानसरोवर के लिए जहां चीन सरकार के वीजा की आवश्यकता होती हैं। वहीं आदि कैलाश के देश में ही होने से मात्र इनर लाइन परमिट की आवश्यकता होती है। आदि कैलाश तक सड़क बनने के बाद से ज्योलिंगकोंग तक वाहन से पहुंचा जा रहा है।
आदि कैलाश तक मार्ग बनने के बाद आदि कैलाश पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ज्योलिंगकोंग आने के बाद आदि कैलाश को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के रूप में पहचान मिली है।
आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन करने इन दोनों हर रोज सैकड़ों की संख्या में यात्री धारचूला पहुंच रहे हैं। धारचूला में सीमित संसाधन होने के कारण सरकार को इनके डेवलपमेंट पर काम करना पड़ रहा है। पिथौरागढ़ प्रशासन भी आदि कैलाश रूट पर रूकने, ठहरने और खाने पीने के संसाधनों को बेहतर करने के लिए नई प्लानिंग पर काम कर रही है। जिससे आने वाले समय में पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।












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