अब महज 20 मिनट में पूरा होगा दून से मसूरी का सफर
देहरादून, 17 अगस्त। देहरादून से मसूरी के बीच भारत का सबसे लंबा रोपवे प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर धरातल पर काम शुरू हो चुका है। राहत की खबर ये है कि प्रोजेक्ट को लगाने के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी सहमति दे दी है। रोपवे निर्माण में उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सौजन्य से लोक सुनवाई का आयोजन किया गया। लोक सुनवाई में सभी उपस्थित ग्रामीणों ने पूर्ण रूप से प्रोजेक्ट को लगाने पर सहमति दी। रोपवे बन जाने से टूरिस्ट दून से मसूरी 20 मिनट से भी कम समय में पहुंच जाएंगे।

जाम और पार्किंग की है समस्या
मसूरी और दून के बीच बनने वाला रोपवे दोनों शहरों के लिए रोमांच और पर्यटन की नई संभावनाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा। दून में मसूरी रोड से पुरकुल तक का इलाका नए सिरे से विकसित होगा। साथ ही मसूरी में भी इससे जुड़े कई विकास कार्य होंगे। जिसका पर्यटकों और स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। मसूरी की सबसे बड़ी समस्या पर्यटन सीजन के दौरान लगने वाला जाम और वाहनों की पार्किंग की कमी है। सीजन में लाखों पर्यटक मसूरी पहुंचते हैं जिससे दून से मसूरी तक 35 किमी का सफर तय करने में ही कई बार टूरिस्ट को घंटों लग जाते हैं। रोपवे बन जाने से इन दोनों से छुटकारा मिल सकता है। लाइब्रेरी चौक पर रोपवे का स्टेशन होगा। जहां पर पर्यटक चढ़ेगे और उतरेंगे।
5.5 किमी लंबा होगा रोपवे
देहरादून से मसूरी के लिए प्रस्तावित रोपवे भारत का सबसे लंबा रोपवे होगा। रोपवे की लंबाई 5.5 किमी होगी। इसमें 60 ट्रॉली लगाने का प्रस्ताव है। गुजरात में भवनाथ की तलहटी से गिरनार पर्वत पर अंबाजी मंदिर तक अब तक का सबसे लंबा रोपवे है। इसकी लंबाई 2.3 किलोमीटर है जिसे रोपवे के जरिए सिर्फ़ सात मिनट में पूरा किया जाता है। इसमें शुरूआत में 24 ट्रॉली लगाई गई। रोप वे के चालू होने से पहले श्रद्धालुओं को 5500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं।
स्थानीय लोगों ने रखी मांगे
मसूरी विधायक और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि 2022 तक इसे शुरू कर दिया जाए। इधर कांग्रेस की प्रदेश महामंत्री गोदावरी थापली का कहना है कि यह प्रोजेक्ट लंबे समय से लटका हुआ है। जिसे स्थानीय लोग जल्द से जल्द शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब वह पुरकुल गांव की प्रधान थी तब से इस प्रोजेक्ट को लेकर होमवर्क शुरू हो चुका था। उन्होंने स्थानीय लोगों और गांववासियों को इस प्रोजेक्ट में शामिल करने और रोजगार देने की भी मांग उठाई है। साथ ही मसूरी के व्यापारियों के लिए एक घंटे फ्री में सेवा देने की भी मांग सरकार से की है। जिससे इस प्रोजेक्ट का लाभ पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों और व्यापारियों को हो, जिससे आय के साथ रोजगार के संसाधन भी जुटाए जा सके।












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