उत्तरकाशी में कन्या भ्रूण हत्या तो नहीं? सीएम ने दिये जांच के आदेश
देहरादून। उत्तरकाशी जिले के 133 गांवों में पिछले 3 माह में 216 बच्चों ने जन्म लिया और आश्चर्यजनक रूप से इनमें एक भी लड़की नहीं है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस सूचना को बेहद गंभीरता से लिया है और जिलाधिकारी को मामले की जांच पड़ताल कर रिपोर्ट देने को कहा है। उत्तराखंड के कई जनपदों में गिरता लिंगानुपात प्रदेश सरकार के लिए पहले से परेशानी पैदा कर रहा है। इस पर उत्तरकाशी की घटना ने सरकार की महिला सशक्तिकरण की सभी योजनाओं पर पानी फेर दिया है। इस प्रकरण ने साबित कर दिया कि प्रदेश सरकार के सभी दावे हवा हवाई रहे हैं और कन्या भ्रूण हत्या को लेकर उसने कोई ठोस नीति नहीं बनाई है।

इस सूचना से केन्द्र प्रायोजित 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' अभियान को भी धक्क लगा है। इस कारण मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तरकाशी के डीएम से रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निश्चित तौर पर ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यह हमारे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए भी चिंताजनक है। इसकी तह में जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि कन्या भ्रूण हत्या की बात सामने आती है तो इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बताया गया है कि स्वास्थ्य विभाग सभी जिलों के हर गांव में होने वाले प्रसवों का ब्योरा तैयार करता है। अप्रैल से जून 2019 के बीच उत्तरकाशी जिले के विभिन्न गांवों में हुए प्रसव की रिपोर्ट सामने आई तो महकमा बेचैन हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 133 गांवों में तीन माह के भीतर कुल 216 प्रसव हुए। इनमें एक भी बिटिया ने जन्म नहीं लिया। गुरुवार को गंगोत्री विधायक गोपाल रावत और डीएम डॉ.आशीष चौहान ने संबंधित गांवों की आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। डीएम का कहना है कि सभी संबंधित गांवों को रेड जोन में शामिल किया गया है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की ओर से भेजी गई रिपोर्ट नियमित रूप से मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। वहीं, विधायक ने एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने को कहा।












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