वाराणसी में हुई राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और सीएम धामी की मुलाकात, निकाले जा रहे सियासी मायने
धामी की नड्डा से वाराणसी में हुई मुलाकात
देहरादून, 5 मार्च। उत्तराखंड में चुनाव परिणाम से पहले भाजपा के अंदर ज्यादा खींचतान नजर आ रही है। पार्टी के अंदर भितरघात को लेकर लग रहे आरोपों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से वाराणसी में मुलाकात हुई है। मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि धामी की चुनाव के बाद के समीकरणों को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष से बातचीत हुई है। भाजपा के अंदर कई दिनों से धामी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने की चर्चा चल रही थी। जो कि पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की जेपी नड्डा से दिल्ली में मुलाकात के बाद से ही लगातार कयास लगाए जा रहे थे।

फिल्डिंग सजाने में जुटे धामी
चुनाव निपटने के बाद से ही पुष्कर सिंह धामी लगातार फिल्डिंग सजाने में लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत से मुलाकात के बाद धामी लगातार बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। धामी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने को दिल्ली में डेरा डाले हुए थे। लेकिन इस बीच भितरघात के आरोपों से पार्टी असहज नजर आ रही थी। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात हुई। जिसके बाद से प्रदेश स्तर पर बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इसके साथ ही विपरीत परिस्थिति में सरकार बनाने के लिए भी पार्टी तैयार नजर आ रही है। जिसको लेकर पहले से रणनीति पर फोकस किया जा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सीएम धामी पहले दिल्ली गए थे और वहां से वह लखनऊ पहुंचे। लखनऊ से फिर वह बनारस पहुंचे। जहां उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात की और राज्य के हालत पर उन्हें फीडबैक दिया है। इससे पहले 17 फरवरी को दिल्ली गए थे, जहां उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं के साथ बैठक की। धामी के सीनियर नेताओं से मिलने के पीछे की वजह पूर्ण बहुमत की सरकार न आने पर आगे की रणनीति पर मंथन करना माना जा रहा है।
निशंक की सक्रियता के मायने
भाजपा के अंदरखाने इस पर भी चर्चा हो रही है कि स्पष्ट बहुमत न मिलने पर धामी की जगह दूसरे दावेदार सामने आ सकते हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के सबसे ज्यादा सक्रिय होने से चर्चा तेज हो गई है। दूसरे विकल्पों में अनिल बलूनी, त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत अन्य कई चेहरों के नाम भी लिए जा रहे हैं। ऐसे में धामी अभी से अपनी फिल्डिंग सजाने में जुटे हैं। जिसके लिए वे हाईकमान के सामने अपना पक्ष भी रख रहे हैं। पार्टी इस समय दोहरी दुविधा में नजर आ रही है। पहली पूर्ण बहुमत की सरकार न आने की परिस्थिति और दूसरा भितरघात के आरोप। पूर्ण बहुमत की सरकार न आने पर भाजपा को जोड़तोड़ में माहिर रणनीतिकार की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके लिए धामी का अनुभव कम ही माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा को पुराने खिलाड़ियों की आवश्यकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की निशंक के मुलाकात के बाद से धामी खेमे में ज्यादा बैचेनी नजर आ रही है। इसके साथ ही भितरघात के आरोपों ने धामी और कौशिक की जोड़ी को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है।












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