सीमांत गांव गुंजी पहुंचने वाले पहले पीएम बनेंगे मोदी, भाजपा के लिए भी खास है ये दौरा, जानिए इसके सियासी मायने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अक्टूबर को भारत चीन सीमा से लगे सीमांत गांव गुंजी पहुंचेंगे। पीएम मोदी के गुंजी पहुंचते ही एक नया रिकॉर्ड बन जाएगा, वे पहले देश के ऐसे पीएम होंगे जो भारत चीन सीमा पर इस सीमांत गांव तक पहुंचेंगे।

पीएम मोदी गुंजी गांव में पहुंचकर लोगों से बातचीत करेंगे। गांव के लोग पीएम को स्थानीय उत्पाद और वेशभूषा भेंट कर सकते हैं। पीएम गांव के लोगों से वाइब्रेंट विलेज योजना का फीडबैक भी ले सकते हैं। पीएम मोदी करीब साढ़े नौ बजे गुंजी गांव पहुंचकर स्थानीय लोगों, आर्मी, आईटीबीपी और बीआरओ जवानों से भी मुलाकात करेंगे।
गुंजी गांव में पीएम मोदी के कार्यक्रम को लेकर जितने उत्साहित स्थानीय लोग हैं, उतनी ही उत्सुकता इस कार्यक्रम को लेकर भाजपा संगठन में भी नजर आ रही है। भाजपा लंबे समय से पीएम मोदी को गुंजी गांव आने का निमंत्रण देती आ रही है। जो उद्देश्य अब पूरा होने वाला है। इससे पहले पीएम मोदी सीमांत गांव माणा में भी कार्यक्रम कर चुके हैं। जिसके बाद से माणा देश का पहला गांव घोषित हो चुका है।
इतना ही नहीं पीएम के लोकल फॉर वोकल पर माणा से ही प्रदेश सरकार आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अब धामी सरकार समसामयिकी और अंर्तराष्ट्रीय सीमाओं के लिहाज से खास गुंजी गांव को भी इसी तरह की पहचान दिलाने में जुटी है। पीएम मोदी के दौरे के बाद राज्य सरकार को उम्मीद है कि यहां की भी पर्यटन, रोजगार और अन्य सुविधाएं बदल जाएंगी।
पिथौरागढ़ के इस सीमांत क्षेत्र से पीएम मोदी और भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले एक नया संदेश भी देशभर में देने की कोशिश करेगी। इसके साथ ही भारत चीन सीमा में बसे गांव में मूलभूत सुविधाओं को भी पूरा करने का सरकार अपना संकल्प पूरा करेगी। यहां इसके बाद कनेक्टविटी भी बेहतर होगी। ऐसा माना जा रहा है।
चीन और नेपाल बॉर्डर पर स्थित गुंजी गांव पिथौरागढ़ में 11 हजार फीट की ऊंचाई पर गुंजी अति दुर्गम इलाका शिव स्थल के नाम से भी प्रसिद्ध है। जो कि चीन सीमा से महज 22 किलोमीटर दूर है। गुंजी गांव कैलाश मानसरोवर यात्रा का भी अहम पड़ाव है। गुंजी भारत-चीन स्थलीय व्यापार का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
बताते चलें कि चीन और नेपाल बॉर्डर पर स्थित गुंजी दुनिया के सबसे खूबसूरत इलाकों में से एक है। कैलाश मानसरोवर यात्रा का अहम रूट होने के साथ ही इस इलाके में आदि कैलाश और ऊं पर्वत भी मौजूद है। शीतकाल में 6 महीने तक यह इलाका बर्फ से ढका रहता है। साहसिक खेलों के लिए यहां कई बेहतरीन ट्रैक रूट भी मौजूद हैं।












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