Nanda Devi Rajjat yatra मां नंदा की बड़ी जात का 21 दिन का कार्यक्रम घोषित, जानिए कब होगी यात्रा
Nanda Devi Rajjat yatra विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात को लेकर चल रहा विवाद अब लगभग समाप्त हो गया है। बड़ी जात यात्रा समिति ने बाकायदा मां नंदा की बड़ी जात का 21 दिन का यात्रा कार्यक्रम भी घोषित कर दिया है।
मां नंदा के मंदिर में बड़ी जात इसी वर्ष 2026 में आयोजित कराने का फैसला लिया गया है। 5 सितंबर को नंदा अपने सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर से कैलाश के लिए विदा होगी। मां नंदा ने अपने मुख्य अवतारी पुरुष पर अवतरित होकर इसी वर्ष कैलाश जाने की इच्छा जताई।

इसके बाद गौड़ ब्राह्मणों ने बड़ी जात आयोजन का दिनपट्टा तय किया। बता दें कि श्रीनंदा देवी राजजात समिति ने इस साल यात्रा स्थगित करते हुए 2027 में कराने का फैसला लिया था। इसके बाद कुरुड़ मंदिर समिति ने महापंचायत कर मां नंदा की बड़ी जात को 2026 में ही कराने का ऐलान कर दिया। जिसको लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी।
महापंचायत ने 23 जनवरी को वसंत पंचमी पर्व पर कुरुड़ में मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में बड़ी जात के शुभारंभ का मुहुर्त निकालने का निर्णय लिया गया था। जिसके अनुसार ही आज वसंत पंचमी पर्व पर शुक्रवार को मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर परिसर में नंदा की बड़ी जात का दिनपट्टा कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया था। मां नंदा ने अपने मुख्य अवतारी पुरुष पर अवतरित होकर इसी वर्ष कैलाश जाने की इच्छा जताई। इसके बाद गौड़ ब्राह्मणों ने बड़ी जात आयोजन का दिनपट्टा तय किया। इसी के साथ मां नंदा की बड़ी जात की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
नंदा की लोकजात प्रतिवर्ष आयोजित होती है, जबकि पंरपरा और आदिकाल से चली आ रही जात (यात्रा) को राजजात के नाम से जाना जाता है। सिद्धपीठ कुरुड़ और नंदा राजजात समिति में एकराय न बनने के बाद इस बार नंदा की राजजात को बड़ी जात का नाम दे दिया गया है। बड़ी जात का नेतृत्व कुरुड़ मंदिर समिति कर रही है। इस जात में बधाण, दशोली, लाता, बंड क्षेत्र के हक-हकूकधारी शामिल हो रहे हैं।
उधर श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा 2027 में होगी। नंदा देवी मंदिर नौटी में राजकुंवर डॉ राकेश कुंवर ने घोषणा की कि 2027 की बसंत पंचमी को दिनपट्टा जारी होगा। एक साल में सरकार से व्यवस्था बनाने की मांग की गई। इस दौरान चमोली के डीएम और एसपी भी मौजूद रहे।
हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात करीब 280 किलोमीटर लंबी यात्रा लगभग 20 दिनों तक चलती है, जिसे हिमालयी महाकुंभ के नाम से भी जाना जाता है। जिसकी अगुवाई चौसिंगा यानी चार सींग वाला खाडू करता है। मान्यता है कि खाडू के जन्म के साथ ही राजजात का समय तय हो जाता है। इसे मां नंदा का प्रतिनिधि माना जाता है। यह यात्रा चमोली के नौटी गांव से शुरू होकर होमकुंड तक जाती है। जो कि हिमालय की सबसे कठिन और पैदल यात्रा मानी जाती है।












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