मसूरी, नैनीताल नहीं अब नागटिब्बा में काफल गांव बन गया टूरिस्ट हब, शांत वादियों में कीजिए प्रकृति का दीदार

उत्तराखंड में नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुके हैं, ​जहां जाकर पर्यटकों को एक नया अनुभव और भीड़ भाड़ से दूर शांत वादियों के बीच स्वर्ग जैसा एहसास हो रहा है। ऐसी ही एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है नागटिब्बा।

उत्तराखंड में टूरिस्ट डेस्टिनेशन की बात करें तो मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश का नाम सबसे पहले पर्यटकों की जुबान पर आता है। लेकिन सीजन में इन जगहों पर जाने की बहुत मारामारी है। जिस वजह से यहां भीड़ बहुत ज्यादा रहती है।

ऐसे में अब उत्तराखंड में कई ऐसे नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुके हैं, ​जहां जाकर पर्यटकों को एक नया अनुभव और भीड़ भाड़ से दूर शांत वादियों के बीच स्वर्ग जैसा एहसास हो रहा है। ऐसी ही एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है नागटिब्बा, जिसे काफल विलेज भी कहते हैं।

Mussoorie Nainital, now Kafal village in Nagtibba has become tourist hub, see nature in quiet valleys tourist

ये जगह पर्यटन के मानचित्र पर खुद को स्थापित कर चुकी है। ये जगह पर्यटकों को कितनी पसंद आ रही है। इसका अंदाजा ​इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां 1 से डेढ़ लाख पर्यटक पहुंच रहे हैं। जिससे यहां के युवा अब रिवर्स पलायन कर रहे हैं। ये दावा किया जा रहा है कि उत्तराखंड में अगर कहीं रिवर्स पलायन देखना है तो काफल विलेज पहुंच जाइए।

मसूरी से करीब 65 किलोमीटर दूर यानि देहरादून से ढ़ाई घंटे के सफर के बाद यमुना नदी के किनारे बसे नैनबाग कस्बे से शुरू होती है कोड़ी पत्वांड़ी और ऐंदी की स्वर्ग सी घाटी। यहीं पर करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर है नागटिब्बा पर्यटन केन्द्र। यहां का अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के गोट विलेज व काफल विलेज सहित 100 सें ज्यादा होम स्टे पर्यटन में शानदार कारोबार कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा होम स्टे इसी क्षेत्र में

उत्तराखंड में इतनी मात्रा में होमस्टे ​कहीं नहीं है। जितना इस क्षेत्र में है। नागटिब्बा पर्यटन स्थल को विकसित करने का श्रेय पंत्वाड़ी गांव के युवा सुभाष रमोला को जाता है। सुभाष रमोला ने इस क्षेत्र को पर्यटन के मानचित्र पर लाने के लिए 2009 में शुरूआत की। सबसे पहले नाग के मंदिर में कथा और पाठ पूजा के जरिए शुरूआत की।

रुकने का 3 हजार तक एक रात का खर्चा

इसके बाद धीरे-धीरे रिजॉर्ट, होम स्टे के कॉन्सेप्ट पर काम किया। सुभाष रमोला ने उत्तराखंड के कई सीनियर नेताओं को भगत सिंह कोश्यारी, प्रकाश पंत को अपने क्षेत्र में ले जाकर इसे एक अलग पहचान दिलाने की हर संभव कोशिश की। जो कि आज एक खूबसूरत वैली बन गई है। नाग टिब्बा ट्रैकिंग के लिए भी खास फेमस है। यहां पर रुकने के लिए टेंट कॉलोनी, होम स्टे सारी सुविधाएं आसानी से मिल जाएंगी। इनमें रुकने के लिए टेंट का 1500 से 3 हजार जबकि होम स्टे 2 हजार तक एक रात का खर्चा है। यहां पहुंचने के लिए 5 किमी पैदल रास्ता है।

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