मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद: कांग्रेस के निलंबन के बाद सोशल मीडिया में वायरल हो रही तस्वीर से मचा हड़कंप
अकील अहमद की एक फोटो सोशल मीडिया में हो रही वायरल
देहरादून, 29 मार्च। उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण बना मुस्लिम यूनिवर्सिटी का मुद्दा कांग्रेस के लिए अब भी मुसीबत का सबब बना हुआ है। हार की समीक्षा करने के बाद कांग्रेस लीडरशिप भी इस बात को स्वीकार कर रही है कि चुनाव में ये मुद्दा कांग्रेस के लिए हार की प्रमुख वजह बनी। इसके बाद भी बयानबाजी करने की वजह से कांग्रेस ने प्रदेश उपाध्यक्ष अकील अहमद को पार्टी से बाहर कर दिया है। लेकिन अकील अहमद के पार्टी से बाहर होते ही एक फोटो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रही है। जिसके बाद फिर से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रदेश में गरमाया फिर से मुद्दा
2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने शुरूआत में हिंदुत्व के मुद्दे पर जनता के सामने अपना विजन रखा। लेकिन चुनाव से ठीक पहले सहसपुर से दावेदारी कर रहे अकील अहमद के एक बयान से सियासी माहौल ही बदल गया। अकील अहमद ने चुनाव में पीछे हटने की वजह सरकार आने के बाद मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की मांग बताई गई। हालांंकि अकील अहमद ने अपने क्षेत्र में अस्पताल, स्कूल और अन्य जरुरी सुविधाओं के लिए भी अपनी मांग रखने की बात की। जिसके बाद भाजपा ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बना दिया। जिससे पूर्व सीएम हरीश रावत पर भी निशाना साधा गया। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने चुनावी संबोधन में इस मुद्दे का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा। पूर्व सीएम हरीश रावत इस पूरे प्रकरण से अपना कोई संबंध न होने का दावा करते रहे।
मुद्दे पर जमकर हो रही राजनीति, कांग्रेस बैकफुट पर
चुनाव हारी तो पार्टी ने अपनी हार के लिए मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर ठीकरा फोड़ दिया। अब हरीश रावत के भी हार के बाद तेवर बदल गए। हरीश रावत ने इस प्रकरण में उन्हें फंसाने और साजिश करने का आरोप लगाया। इतना ही नहीं अपने ही कुछ नेताओं पर उन्हें और उनकी बेटी को हराने की साजिश करने का आरोप लगाया। हरीश रावत ने चुनौती दी कि इस खबर की सत्यता को सामने लाने वाले को वे 1 लाख रुपए ईनाम राशि देंगे। हरीश रावत के इस बयान से अकील अहमद नाराज हो गए और अपनी ही पार्टी के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। अकील ने दावा किया कि वे उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी की नींव रखेंगे। साथ ही उन्होंने अपने सीनियर नेताओं पर टिकट बंटवारे में पैसे के लेन देन का आरोप लगाया। अकील अहमद के इस बयान के बाद पार्टी ने उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। अब अकील अहमद की प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव के साथ एक फोटो भी वायरल हो रही है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। अकील प्रकरण पर कांग्रेस अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी इस प्रकरण से अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आ चुके हैं। उनका दावा था कि अकील अहमद को उपाध्यक्ष किसने बनाया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। इसके साथ ही हरीश रावत भी इस पूरे प्रकरण को लेकर सवाल उठा चुके हैं। हरीश रावत ने सवाल खड़े करते हुए कहा है कि अकील अहमद को पार्टी में किसने जिम्मेदारी सौंपी और हरिद्वार ग्रामीण में पर्यवेक्षक बनाया। इसके बाद से कांग्रेस में फिर से सियासी तूफान आया हुआ है।












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