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Motivational Story: पांचवीं पास भोजनमाता कैसे बनी बच्चों की इंग्लिश गुरु, चमोली की सुषमा देवी की अनोखी कहानी

Motivational Story Bhojanmata Sushma Devi: 55 साल की सुषमा देवी पांचवी पास होने के बाद भी बच्चों के साथ फरार्टदार इंग्लिश में बात करने के साथ ही सीखा भी रही हैं। सुषमा देवी का काम वैसे तो स्कूल में भोजनमाता का है, लेकिन स्कूल में खाना बनाने और ​बच्चों को खिलाने के साथ ही वह खाली टाइम में बच्चों को इंग्लिश की पोएम और भाषा भी सीखाती हैं।

जिसे वह बड़े लगन और पूरी मेहनत के साथ करती हैं। सुषमा देवी का बच्चों को सिखाने और इंग्लिश में बताने का तरीका स्कूल ही नहीं गांव वालों को भी काफी अच्छा लगा। उत्तराखंड के चमोली जिले के दूरस्थ क्षेत्र पोखरी में प्राइमरी स्कूल खाल में सुषमा देवी भोजनमाता के पद पर कार्यरत हैं। जो कि बच्चों के लिए मिड डे बनाने के साथ ही स्कूल की देखरेख और अन्य कामों को भी बखूबी निभाती हैं।

Motivational Inspirational Story Chamoli how 5th pass Bhojanmata Sushma Devi became English teacher children

सुषमा देवी ने बताया कि वह 2003 से स्कूल में भोजनमाता के पद पर कार्यरत हैं। वह हर दिन स्कूल में खाना बनाने और बच्चों को मिड डे योजना के तहत खिलाने से लेकर बच्चों के साथ समय भी बिताती हैं। साथ ही हर बार कुछ नया सीखने की कोशिश करती हैं।

नागालेंड में रही तो इंग्लिश से हुआ लगाव

उन्होंने बताया कि वह पांचवीं तक पढ़ी लिखी हैं। पिता सेना में थे, तो कुछ समय उन्होंने नागालेंड में बिताया। वहां से उनको इंग्लिश के प्रति लगाव हुआ। फिर ​हेडमास्टर मैडम ने उनके स्किल को देखते हुए उन्हें प्रमोट किया और बच्चों के साथ मिलकर कुछ नया प्रयोग किया। आज वह कॉन्फिडेंस के साथ बच्चों को इंग्लिश में नवाचार करने की कोशिश कर रही हैं।

बच्चों को एक्टिविटी भी कराती

स्कूल की हेडमास्टर बीना वशिष्ठ बताती हैं कि सुषमा देवी स्कूल के काम करने के अलावा बच्चों को भी समय देती हैं। जब भी उनको मौका मिलता है तो वह बच्चों को ​इंग्लिश पढ़ाती हैं। खासकर बैगलेश डे के दिन वह बच्चों को एक्टिविटी भी कराती हैं। वह दिल से इस काम को करती हैं। बच्चे भी उनके साथ काफी अच्छा समय बिताते हैं।

नवाचार ​करने की कोशिश

हेडमास्टर ने बताया कि सुषमा देवी के स्किल देखकर शुरूआत में उन्हें भी हैरानी हुई लेकिन धीरे धीरे उन्होंने सुषमा देवी को आगे लाने की कोशिश की और हेल्प भी की। जिसके बाद आज वह काफी कॉन्फिडेंस के साथ पढ़ाती हैं। बीना वशिष्ठ ने बताया कि उनके स्कूल में बच्चों को हर प्रकार से नवाचार ​करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए सुषमा देवी भी मदद करती हैं। साथ ही स्कूल में बेहतर सुविधाएं और शैक्षिक माहौल देने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए वह मिलकर काम कर रहे हैं। इस काम में गांव वालों की भी काफी मदद मिल रही है।

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