लोकसभा चुनाव निपटते ही भाजपा में खिंची तलवारें, विधायकों को लेकर विवाद से बड़ी मुश्किलें
लोकसभा चुनाव निपटते ही उत्तराखंड भाजपा में खींचतान शुरू हो गई है। टिहरी में विधायक किशोर उपाध्याय और पूर्व मंत्री दिनेश धन्नै के बीच हुए विवाद के बाद अब रानीखेत के विधायक प्रमोद नैनवाल और उत्तराखंड राज्य सलाहकार श्रम संविदा बोर्ड के अध्यक्ष (दर्जाधारी) कैलाश पंत के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इससे आने वाले दिनों में भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती है।
उत्तराखंड में भाजपा के अंदर ही अब घमासान शुरू हो गया है। पहले से ही विवादों को लेकर मुश्किल में खड़ी भाजपा के लिए निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव में संकट खड़ा हो सकता है। नया विवाद अल्मोड़ा जिले के रानीखेत के विधायक प्रमोद नैनवाल और उत्तराखंड राज्य सलाहकार श्रम संविदा बोर्ड के अध्यक्ष (दर्जाधारी) कैलाश पंत के बीच सामने आया है।

इतना ही नहीं भाजपा की अंदरूनी कलह और भीतरघात की बात खुलकर सामने आ गई है। अल्मोड़ा जिले के रानीखेत के विधायक प्रमोद नैनवाल और उत्तराखंड राज्य सलाहकार श्रम संविदा बोर्ड के अध्यक्ष (दर्जाधारी) कैलाश पंत के बीच तलवारें खींच गई हैं। दोनों ने एक-दूसरे पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए हाईकमान से कार्रवाई की मांग की है।
अल्मोड़ा संसदीय सीट पर भतरौंजखान में एक प्रधान और विधायक के भाई-भांजे के बीच हुए विवाद के बाद उत्तराखंड राज्य सलाहकार श्रम संविदा बोर्ड के अध्यक्ष (दर्जाधारी) कैलाश पंत और विधायक प्रमोद नैनवाल आमने-सामने हैं। मंगलवार को सीम के प्रधान संदीप खुल्बे ने विधायक के भाई सतीश नैनवाल और भांजे संदीप बधानी पर मारपीट का आरोप लगाते हुए भजरौंजखान थाने में तहरीर दी थी।
इधर, सतीश नैनवाल ने और संदीप बधानी ने भी प्रधान पर गालीगलौज और मारपीट का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। केस दर्ज नहीं होने पर अगले दिन प्रधान के पक्ष में दर्जा मंत्री कैलाश पंत अपने समर्थकों के साथ थाने मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे। इधर, दूसरे पक्ष के समर्थक भी थाने पहुंचे, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
इसके बाद विधायक और दर्जाप्राप्त मंत्री में तलवारें खिच गई है। इससे पहले टिहरी में विधायक किशोर उपाध्याय और पूर्व मंत्री दिनेश धन्नै के बीच बयानबाजी भी हो चुकी है। जिसमें एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लग चुके हैं।












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