Kanwar yatra 2023 यात्रा में कितना आएगा खर्चा, गंगोत्री से लेकर शिव मंदिरों तक खाने, रहने की मिलेगी सुविधा
kanwar yatra 2023: 4 जुलाई से शिव का प्रिय मास सावन मास शुरू होने जा रहा है। जो शिव भक्तों के लिए सबसे बड़ा त्यौहार है। पूरे माह में शिवभक्त शिव की आराधना करते हैं। साथ ही महाशिवरात्रि पर शिव को जल जरुर चढ़ाते हैं।
kanwar yatra 2023: 4 जुलाई से शिव का प्रिय मास सावन मास शुरू होने जा रहा है। जो शिव भक्तों के लिए सबसे बड़ा त्यौहार है। पूरे माह में शिवभक्त शिव की आराधना करते हैं। साथ ही महाशिवरात्रि पर शिव को जल जरुर चढ़ाते हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा कांवड़ यात्रा जोरों पर रहती है। कांवड़ यात्रा 4 जुलाई से शुरू होकर 16 जुलाई तक चलेगी। लेकिन शिव भक्त अभी से गोमुख या गंगोत्री से जल लेकर अपने अपने शिव धाम की तरफ चलने शुरू होते हैं। अगर आप भी इस बार शिव को प्रसन्न करने के लिए कांवड़ लेकर आना चाहते हैं तो आपका कितना खर्चा आएगा। इस खबर में पूरी जानकारी मिलेगी।

कांवड़ यात्रा चार धाम की सबसे अहम यात्रा पड़ाव है। इसमें गंगोत्री व केदारनाथ धाम ही सबसे ज्यादा भक्त पहुंचते हैं। गंगोत्री से जल भरकर कई भक्त केदारनाथ भी चढ़ाते हैं। कुछ भक्त नेपाल तो कुछ अपने अपने शिव मंदिर तक पैदल चलकर जल चढ़ाते हैं। इस यात्रा में अधिकतर पैदल चलने का ही महत्तम है। लेकिन कांवड़ यात्रा में अगर गंगोत्री से अपने गंतव्य को जा रहे हैं तो रास्ते में भैरोंघाटी से लेकर हर पड़ाव पर भंडारे मिल जाते हैं। ऐसे में कांवड़ यात्रा में खाने पीने का कोई खर्चा नहीं होता। सिर्फ गंगा जल ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले छोटे बैग और कांवड़ियों के वस्त्र और डंडों की ही जरुरत पड़ती है।
कांवड़ का सामान मुख्य रुप से हरिद्वार में बिकता है। जहां से गंगोत्री के व्यापारी भी सामान खरीदते हैं। हरिद्वार के अलावा छोटा मोटा सामान ऋषिकेश और गंगोत्री से भी खरीदे जा सकते हैं। गंगोत्री धाम में कांवड़ का सामान बेचने वाले व्यापारी अनुज सेमवाल ने बताया कि गंगोत्री धाम में कांवड़िये पहुंचने शुरू हो गए हैं। कांवड़ यात्रा के लिए जरुरी सामान 500 रुपए तक में ही खर्चा आ जाता है। कांवड़ यात्रा में कांवड़िये को झोली, पिट्ठु, डंडे, नाड़ा, डोरी, गंगाजली, गमछे और भोले की टी शर्ट की आवश्यकता होती है।
कांवड़िये को झोली, पिट्ठु, और गंगाजली का पूरा सामना 250 रुपए तक है। बाकि छोटे मोटे सामान 250 रुपए ओर देकर पूरा हो जाएगा। इस तरह अधिकतम खर्चा 500 रुपए है। इसके अलावा कांवड़ यात्रा में सबसे आकर्षक रहती है रंग बिरंगी और सजावटी कांवड़ जो कि कांवड़िये हरिद्वार के ज्वालापुर से ही खरीदते हैं। हर कांवड़िये अपनी कांवड़ को सबसे आकर्षक बनाने की कोशिश करता है। जिससे वह अलग दिखे। कांवड़ 200 रुपए से लेकर 5 हजार तक की बाजार में उपलब्ध रहती थी। हालांकि ये आपकी आवश्यकता पर निर्भर करती है। जो कि आॅप्शनल होती है।












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