जोशीमठ की तरह गंगोत्री धाम का ये अहम पड़ाव भी 12 साल से झेल रहा भू-धंसाव की समस्या, ग्रामीणों को सता रहा अब डर
उत्तरकाशी का भटवाड़ी कस्बा भी 12 साल से भूस्खलन की जद में आया था। तभी से भटवाड़ी गांव भूस्खलन की समस्या का सामना कर रहा है। ऐसे में अब भटवाड़ी के ग्रामीणों को भी बेघर होने का डर सताने लगा है।

जोशीमठ में भू धंसाव की विकराल समस्या के बाद उत्तरकाशी के भटवाड़ी में भी स्थानीय लोग डरे हुए हैं। बारह वर्ष पहले जोशीमठ की तरह ही उत्तरकाशी का भटवाड़ी कस्बा भी भूस्खलन की जद में आया था। तभी से भटवाड़ी गांव भूस्खलन की समस्या का सामना कर रहा है। ऐसे में अब भटवाड़ी के ग्रामीणों को भी बेघर होने का डर सताने लगा है।
150 से अधिक भवन और होटलों में दरारें
उत्तरकाशी के भटवाड़ी गांव में करीब 300 परिवार रहते हैं। भटवाड़ी गंगोत्री धाम का मुख्य पड़ाव है। यहीं से होकर यात्री गंगोत्री धाम यात्रा को जाते हैं। इस गांव की भौगोलिक स्थिति जोशीमठ की तरह ही है। भटवाड़ी के पास से ही भागीरथी नदी बहती है। जो कि बाद में गंगा कहलाती है। ये क्षेत्र भगवान भास्करेश्वर महादेव सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता है। जिसका काफी पौराणिक महत्व है। ऐसे में अब भटवाड़ी के 300 से ज्यादा परिवारों की इसकी चिंता सताने लगी है। यहां भी 150 से अधिक भवन और होटलों में दरारें आ चुकी हैं। इसके चलते ग्रामीण भू धंसाव को लेकर खौफ में हैं। 2010 में भटवाड़ी गांव और तहसील मुख्यालय पर भू-धंसाव हुआ। उस समय 51 परिवारों के मकान जमीदोज हुए। जिन्हें पास में ही जल विद्युत निगम की कॉलोनी में शिफ्ट किया गया था। तब से ये परिवार इसी जगह पर किसी तरह गुजर बसर कर रहा है। अब ये परिवार भी अपने विस्थापन की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से दोबारा सूची तैयार करने की मांग
भटवाड़ी गांव की प्रधान संतोष नौटियाल ने बताया कि भटवाड़ी क्षेत्र 2010 से लेकर 2013 और अब भी धंस रहा है। यह क्षेत्र कई बार आपदा का सामना कर चुका है। हालांकि 49 परिवारों का विस्थापन हो चुका है। जिन्हें शिफ्ट किया गया है। तब इन परिवारों को 4 लाख रुपए स्वीकृत हुआ था। जिसमें से पहली किश्त 2 लाख रुपए की किश्त मिली थी। अब भी एक किश्त मिलनी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस राशि को 8 लाख रूपए करने की मांग की है। साथ ही मांग की है कि उस दौरान सर्वे में कुछ लोग छूटे हुए हैं, जिनका घर जमीदोंज हो चुका है। उनको शामिल नहीं किया गया। ऐसे दर्जनों परिवार छूट हुए हैं। इसके लिए प्रशासन से दोबारा सूची तैयार करने की मांग की जा रही है। ग्राम प्रधान का कहना है कि ये ऐतिाहासिक कस्बा है। जो कि 12 साल से आपदा का दंश झेल रहा है। सालों से ग्रामीण पूरे गांव को शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं।
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भटवाड़ी को भास्कर प्रयाग के नाम से भी जाना जाता
गंगोत्री धाम से लगभग 70 किलोमीटर पहले पड़ने वाला गांव भटवाड़ी है। यहां तीन नदियां गंगा, नवला और शंखधारा का संगम होने के कारण भटवाड़ी को भास्कर प्रयाग के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही भटवाड़ी के निकट पौराणिक सूर्य मंदिर समूह के दो मंदिर नजर आते हैं। इनमें मूर्तियां और विभिन्न प्रकार के नकाशीदार पत्थर हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों के मुताबिक यह मंदिर राजपूतकालीन के समय 9वीं सदी का बना हुआ है। इस कारण इस स्थल का महत्व और भी बढ़ जाता है। वहीं स्कंद पुराण के अनुसार कालांतर में आद्य शंकराचार्य ने भास्कर प्रयाग के पास शिव मंदिर का निर्माण किया था। जो आज भी मौजूद है। मान्यता है कि इस शिव मंदिर में भगवान के साक्षात दर्शन होते हैं। सावन के महीने इस मंदिर में पूजा अर्चना करने का अलग ही महत्व माना जाता है।












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