​जिस जगह को 'मि​नी जोशीमठ' बनाने की चल रही तैयारी, उसे लेकर शुरू हुआ ये विरोध, फंस सकता है पेंच

जोशीमठ के प्रभावितों को पीपलकोटी बसाने का विरोध शुरु हो गया है। प्रभावितों को पीपलकोटी के सेमलडाला मैदान में विस्थापित करने का बंड विकास संगठन विरोध कर रहा है। इसको लेकर संगठन ने जिलाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा है।

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धार्मिक और पर्यटन का प्रमुख पड़ाव जोशीमठ को इन दिनों उपजे हालातों को लेकर विस्थापन करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। भू धंसाव और दरारों की वजह से जोशीमठ के लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है। राज्य सरकार ने यहां के लोगों के विस्थापन का पहला विकल्प पीपलकोटी को चुना है। जिसके बाद से पीपलकोटी के बारे में लोग जानना चाहते हैं कि क्या जोशीमठ के प्रभावितों के लिए पीपलकोटी सही चुनाव है। हालां​कि विस्थापन से पहले ही पीपलकोटी के लोगों का विरोध शुरु हो गया है। पीपलकोटी से जोशीमठ 38 किमी जबकि बद्रीनाथ 75 किमी है।

करीब दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में 125 से 130 परिवारों को बसाया जाएगा
जोशीमठ में जिस तरह के हालात पैदा हुए हैं, उसके बाद इस ऐतिहासिक शहर को बसाने के​ लिए सरकार ने होमवर्क शुरु कर दिया है। इसके लिए चमोली जिला प्रशासन ने जीएसआई की ओर से भूमि सर्वेक्षण जांच के बाद पीपलकोटी में स्थायी विस्थापन के लिए दो हेक्टयर भूमि को हरी झंडी दे दी है। अब सीबीआरआई की ओर से भूमि का विकास और भवनों के लेआउट बनाने का काम किया जाएगा। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि समुद्रतल से 1260 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पीपलकोटी में स्थायी विस्थापन के लिए भूमि को चिह्नित कर लिया गया है। जोशीमठ शहर से करीब 36 किमी की दूरी पर स्थित पीपलकोटी में करीब दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में 125 से 130 परिवारों को बसाया जाएगा। यहां लोगों को पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे, जो लोग मुआवजा लेकर खुद घर बनाना चाहेंगे, उसका भी विकल्प दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा भी तीन अन्य स्थानों पर स्थायी विस्थापन के लिए भूमि चयन की गई है। इनमें कोटी फार्म, एचआरडीआई की भूमि और ढाक गांव में स्थित भूमि शामिल है। इनमें से एक कोटी फार्म में स्थित उद्यान विभाग की भूमि पर पहले चरण में तीन प्री-फेब्रीकेटिड डेमोस्ट्रेशन भवन बनाए जाएंगे।

सेमलडाला मैदान में विस्थापित करने का बंड विकास संगठन विरोध कर रहा

उधर जोशीमठ के प्रभावितों को पीपलकोटी बसाने का विरोध शुरु हो गया है। जोशीमठ नगर क्षेत्र में हो रहे भू धंसाव के चलते यहां के प्रभावितों को पीपलकोटी के सेमलडाला मैदान में विस्थापित करने का बंड विकास संगठन विरोध कर रहा है। इसको लेकर संगठन ने जिलाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा है। बंड विकास संगठन के अध्यक्ष शंभू प्रसाद सती का कहना है कि क्षेत्रवासियों को इस बात की जानकारी मिली है कि बंड क्षेत्र पीपलकोटी सेमलडाला मैदान में प्रभावितों को विस्थापित किए जाने की प्रशासन की मंशा है, जबकि यह स्थान पूरे क्षेत्र का एक मात्र स्थान है जहां पर क्षेत्र की कई गतिविधियां संचालित होती रहती है। इसमें ब्लॉक स्तर जिला स्तर राज्य स्तर तक के खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ कि राज्य में विकास औद्योगिक पर्यटन मेले का भी आयोजन होता आ रहा है।

जबरन अधिग्रहित किया गया तो इसका पुरजोर विरोध

संगठन के महामंत्री हरिदर्शन सिंह रावत ने बताया कि 1986 से इस जगह पर क्षेत्र की सभी गति​विधियां संचालित की जा रही है। इसके अलावा इस मैदान में हेलीकॉप्टर उतारने की सुविधा है, जो कि आपदा के समय भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि 50 वर्षों पूर्व यह भूमि काश्तकारों से लेकर सिंचाई विभाग ने विष्णुप्रयाग परियोजना के लिए अधिग्रहित की थी, जबकि बाद में जेपी ग्रुप को स्थानांतरित की गई। तब से इस भूमि पर यहां के लोगों का कब्जा है। जो कि नियम के हिसाब से लोगों को अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के भी कई गांव भू धंसाव की जद में है। साथ ही चेतावनी दी कि प्रशासन की ओर से यदि क्षेत्र की भूमि को जबरन अधिग्रहित किया गया तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। इसके लिए 21 जनवरी को क्षेत्रवासियों ने एक बड़ी बैठक आयोजित की है। जिसमें आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

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    पीपलकोटी के लोगों का हक छीन कर जोशीमठ को देने की खबर फैलाना चाल

    जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल स​ती का कहना है कि पीपलकोटी में जहां सरकार ने जगह प्रस्तवित की है वह उस क्षेत्र की खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों का एक मात्र स्थान है। उस क्षेत्र के लोगों को नाराज कर , उनके एक मात्र सार्वजनिक स्थल को छीन कर दिया जाना हम भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। वैसे भी वह हमारी प्राथमिकता में कभी था ही नहीं। पीपलकोटी के लोगों का हक छीन कर जोशीमठ को देने की खबर फैलाना सरकार व प्रशासन की चाल है। जिससे जनता का आपस मे ही टकराव हो जोशीमठ के लोगों को जो अभूतपूर्व समर्थन, भावुक प्रेम मिल रहा है, उसमें कैसे दरार डाली जाए यह उसी के लिये फेंका गया पत्ता है।

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