परिसंपत्तियों के मामले में धामी ने मारा सिक्सर, विपक्ष के लिए आसान नहीं चुनावी पिच पर बैटिंग, जानिए पूरा मसला
21 साल से चल रहा परिसंपत्तियों का विवाद सुलझाने से भाजपा फ्रंटफुट पर
देहरादून, 19 नवंबर। उत्तर प्रदेश के साथ 21 साल से चल रहा परिसंपत्तियों का विवाद योगी आदित्यनाथ और पुष्कर सिंह धामी की जोड़ी ने सुलझा लिया है। जिसको लेकर भाजपा अब चुनावी समर में जाने वाली है। धामी के इस सिक्सर से विपक्ष खेमा पूरी तरह से अटैक मोड में आ गया है। जिसको लेकर अब श्वेत पत्र जारी करने की तक मांग हो रही है।

ट्रिपल इंजन पर विपक्ष हमलावर
केन्द्र में मोदी, यूपी में योगी और उत्तराखंड में धामी यानि ट्रिपल इंजन सरकार ने यूपी के साथ उत्तराखंड के परिसंपत्तियों के विवाद का प्रकरण सुलझा लिया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न्यायालय के सभी प्रकरण भी वापस लेने का ऐलान किया है। जिससे बड़े भाई यानि यूपी और छोटे भाई यानि उत्तराखंड में आपसी भाईचारा बना रहे। योगी और धामी की जोड़ी के कमाल से उत्तराखंड में चुनावी पिच पर धामी सरकार का ये बड़ा सिक्सर माना जा रहा है। जिसका लाभ चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। भाजपा जहां इसे अपनी जीत बता रही है, वहीं विपक्ष भाजपा के इस दावे पर अभी संदेह खड़ा कर रही है। विपक्ष को इस बात का भी डर सता रहा है कि जिस मुद्दे को लेकर वे भाजपा के ट्रिपल इंजन को निशाना बनाते रहे हैं वह मुद्दा इस प्रकरण के बाद खत्म हो जाएगा। जिसका लाभ भाजपा उठा सकती है।
हरीश रावत ने किए अपने दावे
पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि उनके समय में केवल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। सिंगल इंजन के बावजूद हमने परिसंपत्तियों के मामले निपटाए। लेकिन आज केंद्र में भाजपा, यूपी में भाजपा और उत्तराखंड में भी भाजपा की सरकार है। तीनों जगह भाजपा सरकार होने के बावजूद परिसंपत्तियों का विवाद नहीं निपटा। स्थिति जस की तस बनी है। जबकि हमारे समय में सिंगल इंजन, तीनों जगह अलग-अलग सरकारें, उसके बावजूद हमने नहरों का मामला निपटाया, कुछ जलाशयों का मामला निपटाया, रोडवेज की परिसंपत्तियों का मामला कुछ सीमा तक निपटाया। हरीश रावत ने कहा कि हमने जमरानी पर उत्तर प्रदेश सरकार से पब्लिक कमिटमेंट कराया कि हम राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के रूप में एक एमओयू साइन करेंगे और उस एमओयू के लिए केवल दो शर्तें रखी गईं कि जितना पानी किच्छा से नीचे उतर प्रदेश के पास है, वो मात्रा बनी रहेगी। दूसरा एमओयू कि बिजली में उनको कुछ शेयर दिया जाएगा, लेकिन आज जमरानी पर बात आगे नहीं बढ़ रही है, रोडवेज का मामला और उलझ गया है, नहरों और जलाशयों पर उत्तर प्रदेश ने जितना हस्तांतरण कर दिया था परिसंपत्तियों का, उससे आगे बात नहीं बढ़ पाई है। तो तीनों जगह एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद और उत्तर प्रदेश में उत्तराखंडी व्यक्ति के मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी परिसंपत्तियों का निपटारा नहीं हो पाया। अब एक राजनैतिक चर्चा के लिए कि हम भी कुछ कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री मिल रहे हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि अच्छा है दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री मिलें, लेकिन उत्तराखंड के सीएम खाली हाथ न आएं। यूपी से कुछ लेकर आइए और उसे बताइए।
कर्नल भी कूदे, श्वेत पत्र की मांग
आम आदमी पार्टी के सीएम प्रत्याशी कर्नल अजय कोठियाल ने परिसंपत्तियों के बंटवारे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कोरी बयानबाजी करने के बजाए श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश के लोगों को सच बताने की मांग की है। कोठियाल ने कहा कि प्रदेश में चुनाव के लिए 100 दिन का समय भी नहीं बचा है। भाजपा सरकार यूपी और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे पर कोरी बयानबाजी कर प्रदेश के लोगों को गुमराह कर रही है। मुख्यमंत्री धामी को चाहिए कि परिसंपत्तियों पर श्वेतपत्र जारी कर सच बताएं। उत्तराखंड के लोगों के मन में सवाल है कि 21 साल बाद भी 20 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की परिसंपत्तियां हमें क्यों नहीं मिल पाई हैं। राज्य गठन के बाद भी हमारी जमीन, हमारे संसाधनों, संपत्तियों पर उत्तर प्रदेश का कब्जा बरकरार है। 21 साल पहले जब उत्तराखंड अलग राज्य बना था, तब भी केंद्र के साथ ही यूपी और उत्तराखंड तीनों जगह भाजपा की सरकार थी। आज 21 साल बाद भी वही स्थिति है। केंद्र, यूपी और उत्तराखंड में भाजपा की ट्रिपल इंजन की सरकार है। इसके बावजूद हर साल औसतन एक बैठक होती है। जिस पर लाखों खर्च करने के बाद भी नतीजा शून्य है।












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