HOLI: गोपीनाथ भगवान के साथ होल्यारों की खास होली, युवाओं की रंगों के साथ मस्ती और धमाल, जानिए क्या है मान्यता
HOLI 2025: होली मनाने को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को पूरे देश में होली का आयोजन होगा। हर तरफ होली को मनाने के लिए अपने अपने तरीके से लोग तैयारियों में जुट गए हैं। होली के रंग जितने हैं, उतने ही तरह से लोग अपने तरीके से होली मनाते हैं।
रंगों के अलावा फूलों,भस्म समेत होली के कई रंग हैं। इसके अलावा शिवभक्तों की अपनी होली होती है। जो कि भक्ती के साथ साथ ही इस खास पर्व को मनाते हैं। ऐसे ही खास होली चमोली जिले के गोपेश्वर में अनूठे ढंग से मनाई जाती है।

गोपीनाथ मंदिर की होली अनूठी है। यहां की होली भोलेनाथ को समर्पित होती है। कहा कि जिस तरह ब्रज में कान्हा के साथ होली मनाई जाती है, उसी तरह गोपेश्वर में होल्यार गोपीनाथ भगवान के संग होली खेलते हैं।यहां गांव-गांव से पहुंची होल्यारों की टोली भगवान गोपीनाथ के मंदिर में होली मनाने पहुंचते हैं।
इस दौरान मंदिर की रंगत देखते ही बनती है। दिनभर भोलेनाथ संग होली खेलने के बाद टोलियां अपने-अपने क्षेत्र के लिए लौट जाती हैं। लंबे समय से यहां यह परंपरा चल रही है। मान्यता है कि इसी स्थान पर श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी।
स्थानीय मान्यता है कि गोपीनाथ मंदिर क्षेत्र में ही श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी। मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष होली पर्व अनूठे ढंग से मनाया जाता है। नगर क्षेत्र के साथ ही समीपवर्ती गांवों से होल्यारों की टोली मंदिर में पहुंचती हैं। यहां भगवान गोपीनाथ को अबीर, गुलाल अर्पित करने के बाद सभी टोलियां मंदिर परिसर में एकत्रित होती हैं। जिसके बाद पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल-दमाऊं की थाप पर होल्यार झूमकर नाचते हैं।
गोपीनाथ मंदिर परिसर में होली मनाने के लिए युवक-युवतियां सैकड़ों की संख्या में पहुंचते हैं। वे अपने मोहल्लों में होली खेलने के बाद मंदिर परिसर में पहुंचते हैं और यहां होली गीतों पर जमकर थिरकते हैं। इस दौरान अबीर, गुलाल भी उड़ाया जाता है। गोपीनाथ मंदिर समिति की ओर से परिसर में होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।












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