Holi 2024: उत्तरकाशी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों ने खेली भस्म की होली, जानिए क्यों खास है परंपरा
होली को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है। होली रंग के साथ ही पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक रंगों का संदेश लेकर आई है। यही संदेश देने के लिए उत्तरकाशी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों ने भस्म की होली खेली। आज होली पर सुबह काशी विश्वनाथ के महंत अजय पुरी ने पहले बाबा विश्वनाथ को भस्म लगाया इसके बाद भक्तों को प्रसाद के रूप में भस्म देकर होली खेली गई।

इस दौरान भक्तों में जबरदस्त उत्साह नजर आया और जमकर होली के गीत और भजन गाकर होली मनाई। काशी विश्वनाथ के पुजारी हंत अजय पुरी ने बताया कि पिछले 10 से 12 सालों से काशी विश्वनाथ मंदिर में भस्म की होली खेली जा रही है। जिसमें भक्त बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह होली पर कैमिकल रंगों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है और त्यौहार में रंग का गलत प्रयोग का प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
उस को देखते हुए भस्म की होली खेलकर एक नया संदेश देने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि भगवान भोले नाथ को भस्म अति प्रिय है। महाकाल की भस्म आरती प्रसिद्ध है। ऐसे में भस्म होली के जरिए भक्ती और त्यौहार को जोड़ने की पहल है। जो कि अब परंपरा बनती जा रही है।
उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले में है विश्वनाथ मंदिर। मान्यता है कि उत्तराखण्ड के काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम द्वारा की गई थी। जहां स्वयंभू शिवलिंग है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का निर्माण गढ़वाल नरेश प्रद्युम्न शाह ने करवाया था , बाद में उनके बेटे महाराजा सुदर्शन शाह की पत्नी महारानी कांति ने 1857 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।
विश्वनाथ मंदिर में जो प्राचीन शिवलिंग है वह दक्षिण की ओर झुका हुआ है। जो कि पूरे भारत में एक मात्र ऐसा शिवलिंग है। दूसरे सभी उत्तर की दिशा में हैं। चारों धाम से जुड़ी एक मान्यता ये भी है कि उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर की पूजा अर्चना किये बिना गंगोत्री धाम की यात्रा के पूरी नहीं होती। मंदिर परिसर के गर्भगृह में देवी पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित है और साथ ही साथ भगवान साक्षी गोपाल और बाबा मार्कंडे मंदिर भी हैं। मंदिर को कत्युरी शैली में बनाया गया है।












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