विश्वनाथ और महाकाल मंदिर की तर्ज पर हरिद्वार की हर की पैड़ी पर भी बनेगा कॉरिडोर, ये है सरकार का प्लान

काशी विश्वनाथ मंदिर और उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर हरिद्वार की हर की पैड़ी पर भी कॉरिडोर बनाया जाएगा। योजना के तहत पूरे हर की पैड़ी क्षेत्र का मास्टरप्लान बनाकर भव्य रुप दिया जाएगा।

Haridwar Har Ki Paadi corridor Vishwanath and Mahakal temple pushkar dhami government plan

काशी विश्वनाथ मंदिर और उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर हरिद्वार की हर की पैड़ी पर भी कॉरिडोर बनाया जाएगा। योजना के तहत पूरे हर की पैड़ी क्षेत्र का मास्टरप्लान बनाकर भव्य रुप दिया जाएगा।

हर की पैड़ी पर कॉरिडोर बनाने को मंजूरी

उत्तराखंड में धामी सरकार भी अब हिंदू आस्था के प्रतीक शहरों को सुंदर और भव्य रुप देने में जुट गई है। इसके लिए कैबिनेट में हर की पैड़ी पर कॉरिडोर बनाने को मंजूरी मिल गई है। ये कॉरिडोर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर बनाया जाएगा। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की बोर्ड मीटिंग में इस प्रस्ताव के पास होने के बाद अधिकारियों ने इसके लिए कवायद पहले ही शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद पूरी योजना की मॉनिटरिंग करेंगे। इसका उद्देश्य कॉरिडोर बनने से हरिद्वार आने वाले यात्रियों को अच्छी सुविधा मिलेगी। हरिद्वार कॉरिडोर काफी आकर्षण का केंद्र भी होगा। जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी भी नजर नहीं होगी। अक्सर बड़े पर्वों पर ​हरिद्वार में हजारों, लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। काशी विश्वनाथ और महाकाल में भी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बाद प्रोजेक्ट पर काम किया गया। बता दें कि कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होने के साथ ही आय भी बढ़ जाती हें। इससे जहां शहर और घाट व्यवस्थित नजर आएंगे, वहीं साफ सफाई भी सही तरह से हो सकेगी।

हर की पैड़ी सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल
उत्तराखंड को देवभूमि कहा गया है। यहां चार धाम के अलावा कई तीर्थ और धार्मिक नगरी हैं। इनमें हरिद्वार में स्थित हर की पैड़ी सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां साल भर लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। हर की पैड़ी का मतलब है भगवान विष्णु के चरण बताया गया है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से पाप से मुक्ति हो जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के वक्त निकले अमृत को लेकर देवताओं और राक्षसों के बीच युद्ध छिड़ गया था। उसी वक्त भगवान विश्वकर्मा अमृत को दानवों से बचाकर ले जा रहे थे तो अमृत की कुछ बूंदे धरती पर गिर गई थीं। कुछ बूंदे हरिद्वार में भी गिरी थीं और उसके बाद ये जगह हर की पैड़ी कहलाई। ये भी मान्यता है कि यहां मृत्यु होने पर मोक्ष प्राप्ति हो जाती है। हिंदू धर्म मानने वाले एक बार अस्थिकलश लेकर हरिद्वार जरुर आते हैं। हर की पौड़ी में एक शिला में भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं। इसी वजह से इस घाट को हर की पौड़ी के नाम से जाना जाता है। यहां की गंगा आरती को देखने श्रद्धाुल दूर दूर से पहुंचते हैं। इसी वजह से ​हरिद्वार का हर की पैड़ी हिंदू धर्म को मानने वालों ​के लिए खास है।

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