हल्द्वानी हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक समेत 35 उपद्रवियों की बढ़ी मुश्किलें, यूएपीए लगा,जानिए अब क्या होगा
हल्द्वानी हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक के बाद पुलिस ने बनभूलपुरा थाने में आग लगाने वाले 35 उपद्रवियों के खिलाफ भी यूएपीए की धारा लगा दी है। इसी के साथ इन पर 16 अन्य धाराओं में भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रभारी अब्दुल मतीन सिद्दीकी के भाई जावेद सिद्दीकी, कई निवर्तमान पार्षद समेत कई नाम शामिल हैं।

बीते आठ फरवरी को हल्द्वानी के बनभूलपूरा में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर उपद्रवियों ने पहले पथराव किया। इसके बाद हल्द्वानी में तनाव हो गया। जगह जगह आगजनी की घटना हुई। इसी बीच बनभूलपुरा थाने में उपद्रवियों ने वाहनों को आग के हवाले कर दिया और थाने में भी आग लगा दी।
इस मामले में पुलिस ने अब्दुल मलिक समेत 36 लोगों को गिरफ्तार किया है। हल्द्वानी हिंसा मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने पूछताछ के लिए अब्दुल मलिक को कोर्ट से चार दिन की रिमांड में लिया है।
यह मामला बनभूलपुरा थाने की ओर से दर्ज किया गया है। पुलिस ने हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक पर ही उत्तराखंड लोक संपत्ति अधिकार अधिनियम, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम और गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के साथ आईपीसी की अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, लेकिन अब बनभूलपुरा थाने की ओर से दर्ज मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 36 लोगों पर भी इन्हीं धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
यूएपीए को वर्ष 1967 में लागू किया गया था। इसे वर्ष 2004 और वर्ष 2008 में आतंकवाद विरोधी कानून के रूप में संशोधित किया गया। अगस्त 2019 में संसद ने कुछ आधारों पर व्यक्तियों को आतंकवादी के रूप में नामित करने के लिए यूएपीए (संशोधन) बिल, 2019 को मंजूरी दी।
यूएपीए के तहत उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है जो आतंकी गतिविधियों में संदिग्ध होते हैं। इस कानून के तहत कम से कम पांच साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अगर कोई भी व्यक्ति आतंक फैलाने के मकसद से देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा और संप्रभुता को खंडित करने की कोशिश करता है या फिर देश या देश के बाहर भारतीयों के साथ आतंकी घटना करने की कोशिश करता है तो वह यूएपीए कानून के दायरे में आएगा।












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