उत्तराखंड: धामी मंत्रिमंडल में विस्तार की चर्चा तेज, जानिए कब और क्या हैं समीकरण

उत्तराखंड में एक बार फिर धामी मंत्रिमंडल में विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के रविवार को एक दिवसीय उत्तराखंड दौरे के बाद अचानक से ये चर्चा फिर से शुरू हो गई है।

उत्तराखंड में एक बार फिर धामी मंत्रिमंडल में विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के रविवार को एक दिवसीय उत्तराखंड दौरे के बाद अचानक से ये चर्चा फिर से शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो मंत्रिमंडल विस्तार और दायित्वधारियों का मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने आया जिस पर सीएम धामी और नड्डा के बीच अलग से बातचीत हुई है। ऐसे में इस बात के संकेत मिले हैं कि बागेश्वर उपचुनाव के बाद कभी भी इस पर सीएम धामी की ओर से कदम आगे बढ़ाया जा सकता है।

Discussion of expansion in pushkar Dhami cabinet intensifies, know when and what are the equations

चुनावी प्रदेश मध्य प्रदेश में भी हाल ही में शिवराज चौहान ने तीन नए मंत्रियों को अपनी टीम में जगह दी है। ऐसे में माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार करने को धामी सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पिछले दिनों खुद मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत दे चुके हैं। सूत्रों का दावा है कि हाईकमान की ओर से संभावित मंत्रियों और दावेदारों की लिस्ट फाइनल की जा चुकी है, जो कि सही समय का इंतजार किया जा रहा है।

उत्तराखंड में चार सीटें मंत्रियों की पहले से खाली है। इसके अलावा दो से तीन मंत्रियों की छुट्टी की भी सोशल मीडिया में कई बार चर्चा हो चुकी है। ऐसे में कम से कम 5 से 6 नए चेहरे धामी मंत्रिमंडल में शामिल करने की भी चर्चा जोरों पर है। जिसके लिए दर्जनभर से ज्यादा दावेदार हैं। हालांकि पुराने चेहरों पर न छेड़कर सिर्फ नए चेहरों को भी शामिल कर लोकसभा तक किसी तरह के विवाद से भी पार्टी बचने की कोशिश कर सकती है।

ये तय माना जा रहा है कि मंत्रीमंडल के नए स्वरुप में लोकसभा चुनाव की छाप दिखनी तय है। धामी सरकार में वर्तमान में 7 कैबिनेट मंत्री हैं। जिनमें सतपाल महाराज, प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य, सौरभ बहुगुणा शामिल हैं।

लोकसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय समीकरण और जातीय समीकरणों को साधने की चुनौती भी है। महिला कोटे से मंत्री बनीं रेखा आर्य के लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावनाएं लगाई जा रही हैं। चंदनराम दास के निधन के बाद दलित कोटे से किसी एक विधायक की एंट्री तय है। इसके अलावा उत्तराखंड में 80 से 100 निगम, परिषद और बोर्ड के ऐसे पद है जिन्हें भरकर भाजपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दायित्वधारियों की लिस्ट बागेश्वर उपचुनाव के बाद कभी भी जारी हो सकती हैं।

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