Dehradun news: पानी की कमी पूरा करने के लिए दो हजार पेड़ों पर लाल निशान! जानिए क्यों चर्चा में है खलंगा

उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून के रायपुर क्षेत्र में स्थित खलंगा चर्चाओं में है। इस क्षेत्र में एक बड़ा जलाशय बनाने की बात कही जा रही है, जिसके लिए 2 हजार पेड़ काटे जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

मामला तब गरमाया जब वन विभाग द्वारा पेड़ों पर लाल निशान लगा दिए गए। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आंदोलन शुरू हो गया। युवाओं ने खलंगा में पर्यावरण बचाने के लिए एक विशेष अभियान छेड़ दिया है।

Dehradun news Red marks on two thousand trees to meet the water shortage Know why Khalanga is in the news

इसके साथ ही चिपको आंदोलन की तरह ही इस बार पेड़ से चिपकर वीडियो के जरिए लोगों को अवेयर किया जा रहा है। कई सामाजिक संगठन इसके विरोध में आ खड़े हुए हैं।

बता दें कि सौंग डैम प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित 150 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी ) का प्लान है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि प्लांट का विरोध नहीं है। विरोध पेड़ काटे जाने का है।

उनका कहना है कि पानी भी जरूरी है और पर्यावरण के लिए पेड़ भी जरूरी। ऐसे में किसी जंगल को काटकर पानी की उपलब्धता कराना नेचर के साथ खिलवाड़ है। प्रोजेक्ट को ऐसे स्थान पर बनाया जाए, जहां पर हरे-भरे पेड़ों को नुकसान न पहुंचे।

जब संगठनों ने विभागीय अधिकारियों से मुलाकात की तो उन्हें आश्वस्त किया गया कि पेड़ों को नुकसान पहुंचाना प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं है। अभी प्रोजेक्ट प्राइमरी स्टेज में है। इसके अलावा दो-तीन स्थानों पर भी विचार चल रहा है।

राजधानी दून में लगातार पानी की समस्या विकराल होती जा रही है। हाल ही में दून से लगी सौंग नदी में एक मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को केंद्र से हरी झंडी मिली है। योजना के तहत दो विभाग इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। सिंचाई विभाग को डैम बनाना है और पेयजल विभाग को देहरादून सिटी के लिए पानी उपलब्ध कराना है।

पेयजल के लिए खलंगा में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित है, जिसकी कार्यवाही चल रही है। विभाग की ओर से हाल ही में खलंगा में सर्वे के लिए पेड़ों पर नंबरिंग की गई। पर्यावरण प्रेमियों के आरोप हैं कि प्रोजेक्ट के तहत करीब 2 हजार पेड़ों पर रेड मार्क किया जा चुका है। जिसका जमकर विरोध चल रहा है।

बताया जा रहा है कि खलंगा के साथ ही द्वारा गांव व नागल हटनाला में भी डब्ल्यूटीपी के लिए विचार किया जा रहा है। अभी तक कहीं भी जगह स्वीकृत नहीं हुई है। दरअसल, अभी तक कहीं 900 मीटर आरएल नहीं मिला है। खलंगा में यह संभावना लग रही थी कि यहां पर प्रस्तावित आरएलक्र(रीवर लेवलक्र)मिल जाएगा।

इसी की तैयारी चल रही थी। यह भी संभावना तलाशी जा रही है कि यदि डैम के ऊपर भी जगह मिलती है तो पानी लिफ्टिंग कर डब्ल्यूटीपी पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा एक और विकल्प पर भी मंथन चल रहा है। वह ये है कि एरिया कम मिलने पर डब्ल्यूटीपी को दो-तीन फ्लोर तक भी बनाया जा सकता है।

प्रदीप कुकरेती, प्रवक्ता, राज्य आंदोलनकारी मंच का कहना है कि पानी की कमी को पूरा करने के लिए सरकार दूसरे प्रयास भी कर सकती है। कई नदियां हैं जिन्हें पुर्नजीर्वित किया जा सकता है। बजाय कि हरे पेड़ों को काटकर प्रोजेक्ट तैयार किया जाए।

उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट का कहना है कि युवाओं ने और कुछ सामाजिक संगठन के लोगों ने तय किया ​है कि हर रविवार को खलंगा में पहुंचकर विरोध जारी रहेगा। अपने फायदे के लिए पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाने दिया जाएगा।

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