Dehradun-Haridwar-Rishikesh: अब मेट्रो नहीं, सड़कों के ऊपर हवा में दौड़ेंगी कारें! क्या है मेगा ट्रांजिट प्लान?
Dehradun-Haridwar-Rishikesh news उत्तराखंड में धामी सरकार यातायात को सुगम बनाने और परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए रोपवे, पीआरटी और ई-बीआरटीएस परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। जिसमें देहरादून में पीआरटी के तीन कॉरिडोर, ई-बीआरटीएस परियोजना के अंतर्गत दो कॉरिडोर प्रस्तावित है।
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड ईबीआरटीएस की विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें देहरादून और हरिद्वार सहित ऋषिकेश क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं की प्रगति पर गंभीर मंथन हुआ।

सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शहरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में जानकारी दी गई कि त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक एनओसी/अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।
निगम द्वारा स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए आवेदन भी कर दिया गया है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगी बल्कि पर्वतीय यातायात दबाव को कम करने में भी सहायक होगी। सचिव ने 30 वर्ष के कंसेशन पीरियड को भविष्य की परियोजनाओं में बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए, ताकि निजी निवेश आकर्षित किया जा सके और परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत हो।
देहरादून में ई-बीआरटीएस- 31.52 किमी का मेगा कॉरिडोर
देहरादून शहर में प्रस्तावित ई-बीआरटीएस परियोजना के अंतर्गत दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। प्रथम कॉरिडोर आईएसबीटी से रायपुर तक होगा, जिसमें 35 स्टेशन प्रस्तावित हैं और कुल लंबाई 31.52 किमी होगी। बैठक के बाद सचिव ने निगम अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस परियोजना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर शहर के मुख्य आवागमन मार्गों को कवर करेगा और सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देगा।
देहरादून पीआरटी के तीन कॉरिडोर देहरादून में पीआरटी परियोजना के अंतर्गत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं-
- क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक
- पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन
- गांधी पार्क से आईएसबीटी पार्क
निगम द्वारा इन कॉरिडोर की डीपीआर तैयार कर अनुमोदन के अनुरूप कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया। सचिव ने निर्देश दिया कि परियोजना को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल से जोड़ा जाए, जिससे शहरी विस्तार सुनियोजित ढंग से हो सके।
चिव द्वारा निगम के अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर (आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन, कुल 17 स्टेशन) का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित आईएसबीटी स्टेशन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई, जिसमें अवगत कराया गया कि स्टेशन निर्माण हेतु 0.64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। संबंधित भूमि का स्वामित्व मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अधीन है। इस पर प्रबंध निदेशक ने परियोजना में शामिल विभिन्न शासकीय भूमि को शीघ्र निगम को हस्तांतरित किए जाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया, ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध रूप से प्रारंभ हो सके।
हरिद्वार शहर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना (डीडीयू पार्किंग-चण्डी देवी-मनसा देवी एवं मल्टीमॉडल हब) की डीएफसी कराये जाने हेतु अनुरोध बैठक में किया गया। हरिद्वार शहर में पीआरटी परियोजना के अंतर्गत चार कॉरिडोर प्रस्तावित हैं-
- सीतापुर से भारत माता मंदिर
- सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर
- लालतारा चौक से भूपतवाला
- गणेशपुरम से डीएवी पब्लिक स्कूल
इस परियोजना में 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं तथा कुल लंबाई 20.73 किमी होगी। यह योजना विशेष रूप से तीर्थ सीजन के दौरान यातायात प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।












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