कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल के मारपीट प्रकरण में मुकदमा, मंत्री का नाम न होने पर विवाद

कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल के मारपीट प्रकरण में फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार पुलिस के मुकदमे दर्ज करने और एफआईआर में मंत्री का नाम न होने पर विपक्ष और लोगों में गुस्सा नजर आ रहा है।

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कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल के मारपीट प्रकरण में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार पुलिस के मुकदमे दर्ज करने और एफआईआर में मंत्री का नाम न होने पर विपक्ष और लोगों में गुस्सा नजर आ रहा है। जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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    कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल से बीच सड़क हाथापाई

    दूसरे पक्ष ने भी मंत्री और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ तहरीर दी

    बीते मंगलवार को कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल के ऋषिकेश में एक स्थानीय व्यक्ति के साथ मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुआ। जिसमें पहले मंत्री ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट की इसके बाद मंत्री के सुरक्षाकर्मियों ने भी जमकर हाथ पांव चलाए। इसके बाद मंत्री ने खुद सामने आकर अपना पक्ष रखा और व्यक्ति पर गाली गलौज करने के साथ ही अभद्रता करने का आरोप लगाया। इसके बाद मंत्री के कर्मचारी की तरफ से पुलिस में कंप्लेन दर्ज कराई गई। बाद में दूसरे पक्ष ने भी मंत्री और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन मुकदमा दर्ज करने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

    सीधे मंत्री को नामजद नहीं किया

    पुलिस की ओर से बलवा और मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन उसमें सीधे मंत्री को नामजद नहीं किया। केवल मंत्री के पीआरओ का नाम ही एफआईआर में लिखा गया। जबकि, तहरीर के अनुसार पहले गाली गलौज मंत्री ने ही शिकायकर्ता के साथ की थी। पहला मुकदमा मंत्री के गनर गौरव राणा की ओर से दर्ज कराया गया। इसमें सुरेंद्र सिंह नेगी और उनके साथी धर्मवीर पर लूट, लोक सेवक के साथ मारपीट और अन्य धाराएं लगाई गई हैं। जबकि, दूसरा मुकदमा सुरेंद्र सिंह नेगी की तहरीर पर दर्ज किया गया।

    बलवा और मारपीट की धाराएं

    सुरेंद्र सिंह नेगी ने तहरीर में लिखा कि शुरुआत में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने उनके साथ गाली गलौज की थी। गंदी गंदी गालियां और धमकी दी गई। इसके बाद धर्मवीर ने अगले घटनाक्रम में पीआरओ कौशल बिजल्वाण व गनर पर मारपीट व गाली गलौज का आरोप लगाया। पुलिस ने इस तहरीर पर भी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया। लेकिन, कौशल बिजल्वाण को ही एफआईआर में आरोपी के तौर पर दर्शाया। इसमें बलवा और मारपीट की धाराएं लगाई गईं। हालांकि सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में मंत्री के मारपीट को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है।

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