BJP के MLA ने उत्तराखंड में 101 विधानसभा सीटें करने की उठाई मांग, शुरू हुई नई बहस, जानिए इसके सियासी मायने
BJP MLA Kishore Upadhyay: उत्तराखंड में लंबे समय से नए जिलों की मांग उठती आ रही है, जिसमें कभी 4 तो कभी 9 से 10 नए जिलों की मांग तेज हुई। लेकिन आज तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। इस बीच अब भाजपा के विधायक ने उत्तराखंड में 101 विधानसभा सीटें होने की मांग की है। जिसके बाद एक नई बहस छिड़ गई है।
टिहरी विधानसभा से भाजपा विधायक किशोर उपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी को पत्र भेजकर उत्तराखंड में 101 विधानसभाएं और 13 लोकसभा सीट किए जाने की मांग की गई है। किशोर उपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी को पत्र भेजकर किशोर उपाध्याय ने उत्तराखंड विधानसभा से प्रस्ताव पास करने की मांग की है, ताकि प्रदेश के उस प्रस्ताव को केंद्र को भेजा जाए।

किशोर उपाध्याय का कहना है कि ये कोई मांग नहीं, समय की अवधारणा है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय जिलों में सीटें ज्यादा होनी चाहिए। मैदान में सीटों से कोई परेशानी नहीं है। लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में कम नहीं होनी चाहिए। नहीं तो राज्य की अवधारणा खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि हमारे यहां जनसंख्या के हिसाब से मानक नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा में 13 और राज्य सभा में कम से कम 5 सीटें होनी ही चाहिए।
किशोर उपाध्याय का कहना है कि कई राज्यों में कम जनसंख्या और कम क्षेत्रफल के आधार पर विधानसभा और लोकसभा सीट निर्धारित है, ठीक उसी फार्मूले को उत्तराखंड में लागू किया जाना चाहिए। किशोर उपाध्याय की इस मांग के बाद उत्तराखंड में नई बहस शुरू हो गई है। बता दें कि वर्तमान में उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटें है। अब विधानसभा सीटों के परिसीमन को लेकर नई मांग तेज हो गई है।
प्रतापनगर के कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नेगी का कहना है कि किशोर उपाध्याय की मांग तो सही है। लेकिन ये होगा कैसे। कहा कि पहाड़ के लोग भी चाहते हैं कि पहाड़ की सीटें परिसीमन में कम नहीं होनी चाहिए। ये चिंता हम सब विधायकों की है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर इसका लाभ मिलेगा कैसे। इसके लिए हम सबको संविधान की अनसूची 5 में शामिल करने के लिए लड़ाई लड़नी होगी। जिससे भू कानून और मूल निवासी दोनों की समस्याएं दूर हो सकती हैं। मैंने इसको लेकर विधानसभा में आवाज भी उठाई है।
उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि उत्तराखंड का इतिहास ही ट्राइबल का रहा है। यहां ब्रिटिश के समय नॉन रेगुलेशन एक्ट था। इसके बाद शिड्यूल डिस्ट्रिक्ट एक्ट जो असम पर लागू था, वो यहां पर भी लागू किया गया। यहां की परिस्थितियां और कल्चर के हिसाब से रखा गया।
उन्होंने एमएलए विक्रम नेगी की बात को सही मानते हुए कहा कि उत्तराखंड को संविधान की अनसूची 5 में शामिल करने की मांग पर विचार होना चाहिए। लेकिन विधानसभा की सीटें बढ़ाने का कोई औचित्य मुद्दा है। हालांकि जय सिंह रावत मानते है कि परिसीमन में भी पहाड़ की सीटें कम नहीं होनी चाहिए ये मांग भी सही है। नहीं तो हिमालयी राज्य की अवधारणा खत्म हो जाएगी। पहली विधानसभा के हिसाब से ही सीटों का परिसीमन होना चाहिए।
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