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ऋषिकेश के मेयर शंभू पासवान से जुड़ा एक और विवाद, जानिए किस प्रमाण पत्र से हो सकती है मुश्किल

ऋषिकेश के मेयर शंभू पासवान एक बार फिर मुश्किल में पड़ते हुए नजर आ रहे हैं। मेयर शंभू के प्रमाण पत्र की जांच शुरू हो गई है। मामला जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा हुआ है। जिलाधिकारी स्तर पर पहली सुनवाई की गई। पहली सुनवाई में ऋषिकेश मेयर शंभू पासवान के प्रमाण पत्र की स्क्रूटनी की गई।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिलाधिकारी इस मामले में प्रमाण पत्र की जांच कर रहे हैं। ऋषिकेश मेयर शंभू पासवान को लेकर तब चर्चा तेज हुई जब एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को चार हफ्ते में शंभू पासवान के प्रमाण पत्र की जांच करने के निर्देश दिए।

Another controversy related Rishikesh Mayor Shambhu Paswan know which certificate can cause trouble

इस मामले में पहली सुनवाई की गई है। देहरादून के जिलाधिकारी के द्वारा इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर कार्यवाही की जा रही है। अभी मामले में प्रमाण पत्र की स्क्रूटनी हो रही है। शंभू पासवान ने हाल ही में निकाय चुनाव के दौरान भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की है। हाई कोर्ट में निर्वाचित मेयर शंभू पासवान के जाति प्रमाण पत्र को लेकर याचिका दाखिल की गई थी। जिसमें उनके प्रमाण पत्रों को लेकर किए गए दावे को गलत बताया गया। मामले में निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश चंद्र मास्टर ने यह याचिका दाखिल की।

याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने देहरादून के जिलाधिकारी को प्रमाण पत्र की जांच के निर्देश दिए थे। फिलहाल जिलाधिकारी के स्तर पर पहली सुनवाई की जा रही है, जिसमें प्रमाण पत्र की स्क्रूटनी की जा रही है। इसको लेकर जिलाधिकारी संबंधित पक्षों को भी सुनेंगे। जिसके बाद लीगल राय लेने के बाद प्रमाण पत्र को लेकर अंतिम स्थिति साफ हो सकेगी।

बता दें कि ऋषिकेश मेयर सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित की गई। जिसमें भाजपा ने शंभू पासवान को प्रत्याशी बनाया। शंभू पासवान बिहार मूल के हैं। जिनको लेकर शुरूआत से ही विपक्ष हमलावर है। ऋषिकेश के विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ​शंभू को टिकट दिलाने के बाद से ही विपक्ष के निशाने पर है। शंभू पासवान मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं, दलित समुदाय से आने वाले शंभू पासवान को प्रेमचंद अग्रवाल का करीबी माना जाता है।

विधायक पर तब बाहरी लोगों को जीताने का आरोप लगा था। जिसके बाद से शंभू के लिए चुनौती खड़ी हो गई। मेयर के चुनाव में भाजपा के शंभू के खिलाफ निर्दलीय मास्टर ने पहाड़ी बनाम बाहरी के नारे के साथ चुनाव लड़ा। हालांकि तब शंभू चुनाव जीते। लेकिन अब शंभू के प्रमाण पत्र को लेकर विपक्ष हमलावर है।

जिसके बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। नैनीताल हाईकोर्ट ने मेयर शंभु पासवान के जाति प्रमाणपत्र संबंधी याचिका निस्तारित कर दी है। साथ ही हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी देहरादून को चार सप्ताह के भीतर मेयर के जाति प्रमाणपत्र की जांच कर निर्णय लेने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की। अगर मेयर का ​जाति प्रमाण पत्र सही नहीं पाया गया तो उनकी कुर्सी जा सकती है।

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