Uttarakhand : यशपाल के जाने के बाद क्या बागियों से भाजपा की हुई डील, हरक और उमेश शर्मा काऊ का बढ़ सकता है कद

रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को साध रही भाजपा

देहरादून, 13 अक्टूबर। पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके विधायक पुत्र संजीव आर्य के कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद से भाजपा में पुराने कांग्रेसी नेताओं को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चे रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को लेकर है। दोनों नेता लंबे समय से कई मुद्दों पर भाजपा के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल चुके हैं। ऐसे में अब चुनावी साल में बागियों को भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के भी कयास लगाए जा रहे हैं।

उमेश शर्मा काऊ को मिलेगा बड़ा ईनाम

उमेश शर्मा काऊ को मिलेगा बड़ा ईनाम

चुनावी साल में दलबदल को लेकर लंबे समय से सियासी पारा चढ़ा हुआ है। भाजपा में सबसे पहले ​अंदरूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब उमेश शर्मा काऊ का रायपुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत के सामने कार्यकर्ताओं के साथ विवाद हुआ। इसके बाद यह विवाद दिल्ली तक जा पहुंचा। देहरादून लौटने पर भी उमेश शर्मा काऊ का पारा कम नहीं हुआ। उन्होंने अपने स्तर के संगठन से फैसला लेने की बात कही। इसके बाद काऊ के कांग्रेस में जाने के कयास शुरू हो गए। यशपाल आर्य के घर वापसी के दिन
उमेश शर्मा काऊ के कांग्रेस ज्वाइन करने की खबरें सोशल मीडिया में तेजी से वायरल होने लगी। लेकिन बाद में खबर आई कि काऊ कांग्रेस मुख्यालय से लौटकर अनिल बलूनी के पास पहुंच गए। अब देहरादून में उमेश शर्मा काऊ को लेकर कई तरह के कयासबाजी भी सामने आने लगी। मीडिया में उमेश शर्मा काऊ को यशपाल आर्य की जगह कैबिनेट में जगह मिलने और रायपुर से टिकट पक्का होने की खबरें सामने आने लगी है। मंगलवार को सीएम आवास एक कार्यक्रम में उमेश शर्मा काऊ मुख्यमंत्री के साथ नजर आए। संकेत साफ है कि उमेश शर्मा काऊ की भाजपा के साथ कुछ डील हो गई है। हालांकि क्या समझौता हुआ ये अभी सबके सामने नहीं आया है।

हरक सिंह को साधने में जुटी भाजपा

हरक सिंह को साधने में जुटी भाजपा

भाजपा की नजर अब सबसे पहले हरक सिंह रावत पर है। हरक सिंह भी कई बार पार्टी और सरकार के लिए मुसीबतें खड़ी करते हैं। इस बार हरक सिंह चुनाव न लड़ने की जिद पर अड़े हैं। इसे भी भाजपा से नाराजगी के तौर पर माना जा रहा है। यशपाल आर्य के कांग्रेस में जाने के बाद प्रदेश संगठन एक्टिव हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने हरक सिंह के साथ हरिद्वार में घंटो तक नए राजनैतिक समीकरणों पर चर्चा की है। कांग्रेस में बगावत करने वालों का नेतृत्व हरक सिंह रावत ने ही किया था। साथ ही हरक सिंह विधायकों को तोड़ने में भी माहिर है। राजनीति के सबसे बेबाक और निडर नेताओं में हरक सिंह का नाम शामिल है। ऐसे में अब भाजपा हरक सिंह के मन को भी टटोलने में जुटी है। हरक सिंह के कदम से कांग्रेस से भाजपा में आए कई विधायकों के पाला बदलने की भी चर्चाएं हैं। ऐसे में हरक सिंह की प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक से मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

भाजपा पर बढ़ा दबाव

भाजपा पर बढ़ा दबाव

दलबदल को लेकर जिस तरह से भाजपा बीते दिनों कांग्रेस के सामने चुनौती खड़ी कर रही थी, वही खेल अब भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। भाजपा का दावा था कि कांग्रेस से आने वालों के लिए भाजपा में हाउसफुल हो रहा है। इसके बाद से कांग्रेस पर बड़ा दबाव नजर आने लगा था। हालांकि तब भी कांग्रेस ने 15 दिनों के भीतर बड़े चेहरे लाने का दावा किया था। अब यशपाल आर्य को विधायक बेटे के साथ कांग्रेस ज्वाइन कराकर कांग्रेस ने भाजपा को बड़ा झटका दिया है। साथ ही कांग्रेस का दावा कि अभी भाजपा के कई और विधायक कांग्रेस के संपर्क में है, इससे भी भाजपा के प्रदेश स्तर के नेताओं पर हाईकमान की और से दबाव बढ़ने लगा है। जिसको डेमेज कंट्रोल करने के​ लिए अनिल बलूनी और मदन कौशिक ने मोर्चा संभाला हुआ है।

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