25 साल बाद घर लौटा घूरन, अब तक हमशक्ल के साथ रह रही थी पत्नी
मिर्जापुर। ऐसा इससे पहले आपने सिर्फ फिल्मों में ही सुना होगा। मामला मिर्जापुर जिले के चुनार कोतवाली क्षेत्र के पतलुकिया गांव का है जहां कर्ज से बचने के लिए 25 साल पहले घर छोड़ कर भागा युवक जब लौटा तो सभी अचंभित रह गए। हो भी क्यों न, उस युवक के परिवार वाले अब तक उसके हमशक्ल के साथ रह रहे थे। युवक को देखकर पूरा गांव हैरान रह गया। काफी हंगामें के बाद दोनों युवकों में से असली युवक की पहचान के लिए पंचायत बुलाई गई तब जाकर 25 साल बाद घर लौटे घूरन को न्याय मिला।

जेल में था घूरन
मिली जानकारी के मुताबिक पतलुकिया निवासी घूरन पच्चीस साल पहले 1992 में घर छोड़ कर चला गया था। घूरन ने बताया कि उसका लकड़ी का कारोबार था जो कि घाटे में चल रहा था। इस वजह से उस पर काफी कर्ज हो गया था। कर्ज से बचने के लिए वो अपनी पत्नी और बच्चों को ससुराल में छोड़कर बिना किसी को जानकारी दिए इलाहाबाद चला गया। वहां पर वह रिक्शा चलाने काम करता था। एक दिन घूरन का किसी व्यक्ति से विवाद हो गया। हाथापाई में उस व्यक्ति की मौत हो गई जिसके बाद घूरन को 20 साल की कैद हो गई।

हमशक्ल के साथ रहने लगी पत्नी
इधर घूरन के घर से भागने के बाद उसके पिता ने उसकी काफी खोजबीन की। इस बीच कुछ साल बाद घूरन के गांव के समीप दियाव में जोगी लोगों ने डेरा डाल रखा था। इनमें से एक जोगी की शख्स घूरन से मिलती जुलती थी। पुत्रवियोग में दुखी पिता को लगा कि यह उसका घूरन है और वह उसे घर ले आया। उधर उस योगी ने भी यादाश्त खो जाने का बहाना बताते हुए खुद को घूरन बताया। लोगों ने जब उससे एक आंख खराब होने के बार में पूछा तो उसने कहा कि एक दुर्घटना में चोट लग गई थी। घूरन के मिलने की खबर सुनकर परिवार में फिर से खुशियां आ गई। घूरन की पत्नी और बच्चे भी सुराल से वापस आ गए और सभी साथ में रहने लगे।

पत्नी ने कहा- अब अकेले रहेंगे
इधर असली घूरन 2014 में जेल से छूटा। जेल से छुटने के बाद वह इलाहाबाद में एख ई-रिक्शा खरीद कर उसे चलाने लगा। हाल ही में वो किसी काम के सिलसिले में वाराणसी गया था। वाराणसी में घूरन के मामा के घर का है। घूरन को अपने मामा की याद आई तो वह उनसे मिलने चला गया जिसके बाद इस राज से पर्दा खुला। बीते मंगलवार घूरन जब अपने मामा के साथ गांव पहुंचा तो उसे देखने के लिए गांव में भीड़ लग गई। घर वाले असली घूरन को देखकर आश्चर्य में पड़ गए। असली घूरन घर लौटा तो नकली और असली को लेकर बहस छिड़ गई। पंचायत बुलाई गई। इसके बाद 25 साल बाद घर लौटे घूरन को असली घूरन साबित किया गया। असली घूरन को पाकर उसके पिता काफी खुश हैं। पिता ने कहा कि अब नकली घूरन के लिए घर में कोई जगह नहीं है। लेकिन घूरन की पत्नी नेमावती और पुत्र राजेश नाराज दिखे। इनका कहना है कि वे अब किसी के साथ नहीं रहेंगे। इन्हें दोनों में किसी की भी जरूरत नहीं है।












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