अखिलेश का साथ छोड़कर मायावती के साथ क्यों जाना चाहते हैं राजभर, जानिए इसकी वजहें
लखनऊ, 18 जुलाई: उत्तर प्रदेश में इस समय काफी सियासी उठा पटक चल रही है। एक तरफ जहां एसबीएसपी के चीफ ओम प्रकाश राजभर अखिलेश से मुंह फेरते जा एह हैं वहीं दूसरी तरफ बीएसपी चीफ मायावती से उनकी नजदीकियां बढ़ रही हैं। राजभर के रुख से ऐसा लग रहा है कि यूपी में नए सियासी समीकरण बन रहे हैं। राजभर ने भी अब संगठन को मजबूत करने के लिए संगठन की बैठकें करनी शुरू कर दी हैं। पार्टी का दावा है कि पूर्वांचल के कई जिलों में बैठक करके पार्टी को और मजबूत करने का काम किया जाएगा जिससे आने वाले 2024 के चुनाव में पार्टी और मजबूत बनकर उभरेगी।

मुख्तार एंड कंपनी के लिए बीएसपी मुफीद जगह
SBSP चीफ ओम प्रकाश राजभर ने अब अखिलेश को छोड़ने का मन बना लिया है। दरअसल ओम प्रकाश राजभर के मायावती के साथ जाने का एक कारण मुख्तार और उनका परिवार भी है। फिलहाल मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी SBSP से विधायक हैं। राजभर को लग रहा है कि मायावती ही एक ऐसा ठिकाना है जहां वो मुख्तार एंड फैमली के साथ आसानी से रह सकते हैं। बीजेपी के साथ आने पर इनपर मुख्तार से पीछा छुड़ाने का भी दबाव रहेगा जिसे वो करना नहीं चाहेंगे। पहले भी राजभर पर मुख्तार अंसारी को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगता रहा है।

मायावती के साथ मिलकर अपनी चुनावी बिसात बिछाएंगे राजभर ?
मायावती के साथ जाने का राजभर को एक फायदा यह भी है कि वो बीजेपी से आसानी से मोर्चा ले सकते हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान बीएसपी की मुखिया मायावती पर बीजेपी का समर्थन करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि आरोप यह भी लगाए गए की अखिलेश को हराने के लिए वो बीजेपी के हिसाब से उम्मीदवारों का चयन कर रही हैं। इसकी बानगी लोकसभा उपचुनाव में भी दिखाई दी जब चुनाव हारने के बाद धर्मेंद्र यादव ने बीजेपी और मायावती के गठबंधन को लेकर बधाई भी दी थी। अब ओम प्रकाश राजभर भी मायावती के साथ मिलकर अपनी चुनावी बिसात बिछा सकते हैं।

राजभर के आने से पूर्वांचल में बीएसपी को मिलेगा फायदा
राजभर के साथ आने का फायदा मायावती को भी है। दरअसल मायावती उत्तर प्रदेश में इस समय संगठन को मजबूत करने के लिए जूझ रहीं हैं। मायावती की पार्टी चार चुनाव हार चुकी है। 2007 के बाद हुए चुनावों के बाद से ही मायावती लगातार हार का सामना कर रही हैं। 2014, 2017, 2019 और 2022 का चुनाव मायावती हार चुकी हैं। मायावती को भी एक सहयोगी की तालाश है जो मुश्किल समय में उनका साथ दे सके। खासतौर से राजभर के साथ आने के बाद पूर्वांचल में वो अखिलेश और बीजेपी को कड़ी टक्कर दे सकती हैं। हालाकि अभी मायावती और राजभर के बीच आधिकारिक मुलाकात नहीं हुई है लेकिन जिस तरह से राजभर बयान दे रहे हैं उससे लग रहा है की अंदरखाने खिचड़ी पक रही है।

BSP में रहकर BJP का कितना नुकसान करेंगे राजभर
अखिलेश यादव के साथ तल्खी के बीच अब सवाल ये खड़ा हो रहा है कि ओम प्रकाश राजभर बीजेपी में क्यों नहीं जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि दरअसल अभी बीजेपी को राजभर की जरूरत नहीं है ये राजभर को भी पता है। इसलिए वो बीजेपी से ज्यादा बीएसपी में अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। राजभर आम चुनाव तक बीएसपी के साथ रहकर बीजेपी से ज्यादा वो अखिलेश यादव का नुकसान करेंगे और इस अभियान में वो बीएसपी की भी मदद करेंगे। पूर्वांचल में राजभरों की अच्छी खासी संख्या है और इसका फायदा राजभर उठाना चाहते हैं। विधानसभा के चुनाव में राजभर ने अखिलेश के साथ मिलकर चुनाव लडा और इसका नुकसान भी बीजेपी को उठाना पड़ा था। लिहाजा अब यही दांव वो मायावती के साथ मिलकर खेलना चाहते हैं।

पूर्वांचल में संगठन को मजबूत बनने में जुटे राजभर
अखिलेश से तल्खी के बीच अब ओम प्रकाश राजभर ने पूर्वांचल में संगठन को और मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। 17 जुलाई को ओम प्रकाश राजभर की वाराणसी में महत्वपूर्ण बैठक की थी। इसमें राजभर की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा आजमगढ़, गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या और देवीपाटन इलाके में बैठकें रखी गई हैं। संगठन की बैठकों और मायावती के साथ जाने की अटकलों के बीच एबीएसपी के प्रवक्ता अरुण राजभर ने कहा कि इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य 2024 के चुनाव को ध्यान में रखकर पार्टी को तैयार करना है। इसके जरिए पार्टी अब नए नेताओं को जिम्मेदारी पकड़ाएगी वहीं नए सदस्यों को भी पार्टी से जोड़ा जाएगा। रही बात मायावती के साथ गठबंधन की तो अभी तो पार्टी अखिलेश यादव के साथ बने गठबंधन का हिस्सा है। आने वाले समय में इसको लेकर फैसला लिया जाएगा।












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