यूपी के एग्जिट पोल में आखिर क्यों भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी?
आखिर क्यों यूपी के चुनावों के बाद एग्जिट पोल में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, सपा-बसपा के वोटबैंक में सेंधमारी भाजपा के लिए गेमचेंजर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव के परिणाम आने से पहले तमाम एग्जिट पोल के नतीजे प्रदेश में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर दिखाया गया है। इंडिया टुडे और माई एक्सिस इंडिया के एग्जिट पोल पर नजर डालें तो भाजपा इस बार यूपी में भाजपा को 265 सीटों दी हैं, एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार इस बार भाजपा अपनी अगड़ी जाति के वोट के अलावा गैर यादव ओबीसी वोट बैंक में सेंधमारी करने में सफल हो रही है।
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काम कर गई शाह की रणनीति
एग्जिट पोल के आंकड़ों की माने तो गैर यादव और ओबीसी वर्ग इस बार सपा सरकार से काफी नाखुश है और इनका मानना है कि सपा ने उन्हें काफी नजरअंदाज किया है, जिसका सीधा फायदा प्रदेश में भाजपा को मिलेगा, सपा और बसपा दोनों के ही वोट बैंक में भाजपा काफी हद तक सेंधमारी करने में सफल होगी। एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा कुर्मी वोटों का 57 फीसदी हासिल करेगी, वहीं लोध वोट बैंक का 63 फीसदी और बाकि के गैर यादव ओबीसी वोट बैंक का 60 फीसदी वोट भाजपा को हासिल होगा। इन वोट बैंकों में भाजपा की सेंधमारी सपा के लिए सबसे बड़ा गेमचेंजर साबित होगी जिसने 2012 में उसे पूर्ण बहुमत में लाने में अहम भूमिका निभाई थी।

गैर यादव ओबीसी वोट बैंक में भाजपा की सेंधमारी
इन पिछड़ी और दलित जातियों को साधने के लिए जिस तरह से भाजपा ने अपनी रणनीति बनाई वह उसके लिए काफी अहम साबित हुई, पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष के लिए केशव प्रसाद मौर्या को आगे बढ़ाया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को इस बात का अंदाजा था कि प्रदेश में गैर यादव ओबीसी वोट बैंक काफी अहम भूमिका निभाएगा, लिहाजा उन्होंने केशव प्रसाद को प्रदेश का अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया और इसके जरिए उन्होंने पार्टी को अगणी जाति की पार्टी के टैग से बाहर निकालने की भी कोशिश की।

नोटबंदी का असर बेअसर
एक्सिस के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि केंद्र सरकार की नोटबंदी का वोटरों पर कोई असर नहीं पड़ा। आंकडो़ं की मानें तो भाजपा को बनिया वोटरों का 64 फीसदी वोट हासिल होगा। यही नहीं भाजपा 55 फीसदी कायस्थ वोटरों को भी अपनी ओर करने में सफल होगी। इन वोट बैंक के अलावा पार्टी 62 फीसदी ठाकुरों और 62 फीसदी ब्राह्मण वोटरों को भी अपनी ओर लाने में सफल होगी। लिहाजा अगणे वोट बैंक के साथ गैर यादव ओबीसी वोट बैंक पार्टी के निर्णायक साबित हो सकता है।

मायावती को हुआ सबसे अधिक नुकसान
तमाम एग्जिट पोल के आंकड़े बसपा पर सबसे ज्यादा चोट कर रहे हैं, ये आंकड़े बसपा को सबसे पीछे दिखा रहे हैं और इस चुनाव में सबसे अधिक नुकसान बहुजन समाज पार्टी को हो रहा है। हालांकि मायावती जाटवों का वोटबैंक अपने पास रखने में सफल रही हैं लेकिन वह अन्य पिछड़ी जातियों को अपने साथ जोड़े रहने में पूरी तरह से विफल नजर आई हैं। एक्सिस पोल के अनुसार बसपा 77 फीसदी जाटवों को अपने साथ रखने में सफल रही हैं, जबकि गैर जाटव वोट मायावती के हाथ से बुरी तरह से फिसल गया है और उन्हें 43 फीसदी गैर जाटव वोट का नुकसान उठाना पड़ा है।












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