तीन खेमों में क्यों बंटा बाहुबली मुख्तार अंसारी का परिवार, जानिए पूरी कहानी

लखनऊ, 14 फरवरी: उत्तर प्रदेश में इस समय चुनावी माहौल चल रहा है। सियासत पूरी तरह से गरम है लेकिन इस बीच ऐसा भी दिलचस्प वाकया सामने आ रहा है कि एक ही परिवार के तीन लोग अलग अलग पार्टियों में बंट गए हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं पूर्वांचल के बाहुबली अंसारी परिवार की। इस परिवार का हर सदस्य इस बार चुनाव में अलग पार्टी का झंडा उठाए नजर आएगा। हर मुद्दे और कार्यक्रम में एक साथ दिखने वाला यह परिवार राजनीतिक फायदे के लिए इस बार बसपा, सपा और सुभासपा के बैनर के साथ चुनाव में प्रचार- प्रसार करता नजर आ सकता है। दरअसल, परिवार में कोई दरार नहीं है लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए मुख्तार अंसारी, अफजाल अंसारी और सिबगतुल्लाह सियासी रूप से अलग नजर आएंगे।

बसपा से सांसद हैं अफजाल अंसारी

बसपा से सांसद हैं अफजाल अंसारी

अफजाल जहां बसपा के टिकट से सांसद है, वहीं उनके बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी ने सपा के प्रत्याशी के तौर पर मोहम्मदाबाद सीट से पर्चा दाखिल किया हैं। जबकि छोटे भाई बाहुबली मुख्तार अंसारी दोनों से अलग सुभासपा के टिकट से चुनाव लड़ सकते हैं। वह जेल में हैं। चर्चा है कि उनके बेटे अब्बास इस बार उनकी सीट से नामांकन करेंगे। 11 फरवरी को मुख्तार के दोनों बेटे ओम प्रकाश राजभर के साथ खड़े दिखाई दिए थें। सूत्रों का कहना है कि मऊ विधानसभा जो कि मुख्तार की पारंपरिक सीट हैं वहां यह परिवार ओम प्रकाश राजभर की पार्टी से प्रत्याशी होगा।

अखिलेश ने मुख्तार को नहीं दिया टिकट

अखिलेश ने मुख्तार को नहीं दिया टिकट

अखिलेश यादव भी मुख्तार अंसारी को पार्टी में लेने से कतरा रहे हैं। क्योंकि भाजपा समेत दूसरे दल उन पर हमलावर हो सकते हैं। ऐसे में अंदरखाने यह दावा किया जाने लगा है कि मुख्तार अंसारी ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का हिस्सा हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर एक और भाई अफजाल अंसारी चूंकि बसपा से सांसद हैं और पार्टी छोड़ने पर दलबदल अधिनियम के तहत उनकी सांसदी जा सकती है। इसलिए वो बसपा में ही बने रहेंगे। ऐसे में देखा जाए तो तीनों भाई पहली बार तीन-तीन अलग-अगल दलों में हैं।

सिबगतुल्लाह ने सपा से किया नामांकन

सिबगतुल्लाह ने सपा से किया नामांकन

इस बीच शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के सिंबल पर गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से अंसारी भाईयों में सबसे बड़े सिबगतुल्लाह अंसारी ने नामांकन किया। उनके साथ सुभासपा के भी कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस सीट से सिबगतुल्लाह को पिछली बार भाजपा की अलका राय ने हराया था। हालांकि, वह यहां से विधायक भी रहे हैं। इस बार शिबगतुल्लाह के लिए परिस्थितियां बदली हुई हैं। उन्हें सपा से टिकट मिला है और अलका राय एक बार फिर बीजेपी की तरफ से चुनाव मैदान में हैं। वहीं कांग्रेस की तरफ से अरविंद किशोर राय और बसपा की तरफ से माधवेंद्र राय चुनाव मैदान में हैं। इससे लगता है कि इस बार अलका राय के लिए चुनाव जीतना इतना आसान नहीं होगा

मुख्तार के बेटे मऊ में बना रहे हैं माहौल

मुख्तार के बेटे मऊ में बना रहे हैं माहौल

वहीं दूसरी ओर बांदा जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी के दोनों बेटे अब्बास अंसारी और उमर अंसारी चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। गौरतलब है कि अब्बास अंसारी को 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने मऊ की घोसी सीट से टिकट दिया था। जहां पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार उनको टिकट देने को लेकर सपा में उथलपुथल मची हुई है। वहीं मऊ की सदर सीट से मुख्तार अंसारी की चुनावी तैयारियों को अंजाम दिया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि इस बार मुख्तार को ओमप्रकाश राजभर की पार्टी से टिकट दिया जा सकता है।

मुख्तार से जेल में मिल चुके हैं राजभर

मुख्तार से जेल में मिल चुके हैं राजभर

सुभासपा के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर मुख्तार अंसारी के बेटे के साथ बांदा जेल में उनसे मुलाकात कर चुके हैं। लौटते वक्त चेकिंग पर भड़कने का मामला भी सामने आया था। ऐसे में मुख्तार या उनके बेटे सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। मुख्तार इस सीट से पिछले डेढ दशक से जीतते रहे हैं और पिछली बार भी मोदी लहर भी वह जीतने में कामयाब रहे थे। इसलिए इस बार भी चुनावी समर में उतर रहे हैं लेकिन इस बार उनकी राह आसान नहीं होगी।

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