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IAS Medha Rupam: नोएडा युवराज केस में क्यों उछला CEC ज्ञानेश कुमार की बेटी का नाम, कौन हैं Noida DM मेधा रूपम?

Noida DM IAS Medha Rupam: नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं रह गई है। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही, रेस्क्यू सिस्टम की नाकामी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक बड़े विवाद में बदल चुका है। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी ने सीधे तौर पर नोएडा की जिलाधिकारी IAS मेधा रूपम को कटघरे में खड़ा कर दिया है और उनके पारिवारिक बैकग्राउंड को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले में सरकार की कार्रवाई को "दिखावटी" करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि IAS अधिकारियों का ट्रांसफर या सस्पेंशन कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। भारद्वाज ने दावा किया कि SDRF और रेस्क्यू ऑपरेशन सीधे तौर पर जिलाधिकारी के अधीन आते हैं, ऐसे में असली जिम्मेदारी नोएडा की DM मेधा रूपम की बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।

Noida DM IAS Medha Rupam

यहीं से विवाद ने नया मोड़ लिया, जब सौरभ भारद्वाज ने एक पोस्ट में यह भी लिखा कि नोएडा की DM मेधा रूपम देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं, इसलिए सिस्टम दोषियों पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है।

कौन हैं IAS मेधा रूपम, जिन पर उठ रहे हैं सवाल (Who is Noida DM IAS Medha Rupam)

  • IAS मेधा रूपम 2014 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी हैं और गौतम बुद्ध नगर यानी नोएडा की पहली महिला जिलाधिकारी हैं। इससे पहले वे कासगंज की DM रह चुकी हैं और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अतिरिक्त CEO की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।
  • IAS Medha Rupam Education: मेधा रूपम का जन्म आगरा में हुआ। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने केरल के एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम से की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की।
  • मेधा रूपम ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2013 में ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की थी। उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट मनोविज्ञान था। 2014 में IAS बनने के बाद उन्होंने बरेली में सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में करियर की शुरुआत की और फिर मेरठ, हापुड़ और कासगंज जैसे जिलों में अहम प्रशासनिक पदों पर रहीं।
  • फरवरी 2023 से जून 2024 तक वे ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर भी तैनात रहीं।

शूटिंग में गोल्ड मेडलिस्ट, अलग पहचान

IAS मेधा रूपम सिर्फ प्रशासनिक अफसर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राइफल शूटर भी हैं। उन्होंने केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीते हैं और 2009 में राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया था। विश्वविद्यालय स्तर पर भी वे कई शूटिंग प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं।

पूरा परिवार प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ा (Noida DM IAS Medha Rupam Family)

मेधा रूपम का परिवार भी अपने आप में खास है। उनके पिता ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। वे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ काम कर चुके हैं और सहकारिता मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं।

मेधा के पति मनीष बंसल भी 2014 बैच के IAS अधिकारी हैं और फिलहाल सहारनपुर में तैनात हैं। उनकी बहन अभिश्री IRS अधिकारी हैं, बहनोई अक्षय लाबरू IAS हैं, चाचा IRS और फूफा IPS अधिकारी रह चुके हैं।

क्या है नोएडा युवराज केस, जिसने सिस्टम को हिला दिया

16 और 17 जनवरी की दरमियानी रात युवराज मेहता गुरुग्राम से नोएडा सेक्टर-150 स्थित अपने घर लौट रहे थे। घने कोहरे और बेहद कम विजिबिलिटी के बीच उनकी कार एक निर्माणाधीन साइट की टूटी बाउंड्री से टकराकर 30 से 70 फीट गहरे, पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। आरोप है कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद सुस्त रहा और मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमला युवराज को समय रहते नहीं बचा सका। इस घटना ने नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

युवराज मेहता की मौत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम को पद से हटा दिया। 19 जनवरी को उन्हें वेटलिस्ट में डालते हुए नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के MD पद से भी हटाया गया।

इसके अलावा एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया, कई अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी हुए और तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम बनाई गई है, जो पांच दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।

हादसा या सिस्टम की विफलता, जांच पर टिकी नजर

नोएडा युवराज केस अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सिस्टम की पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा बन चुका है। जांच रिपोर्ट क्या सामने लाती है और क्या जिम्मेदारी तय हो पाती है, इस पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है।

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