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कौन हैं Inspector Vikram Singh? जिन्होंने वृद्ध महिला का दाह संस्कार कर दिलाई कोरोना काल की याद

Inspector Vikram Singh: दबंग इरादों और दिल में करुणा का भाव रखने वाले कॉम्बो कॉप इंस्पेक्टर ने महिला के शव का दाह संस्कार किया। इंस्पेक्टर मानवता की मिसाल पेश की है।

Inspector Vikram Singh: कोरोना काल का खौफनाक मंजर शायद ही कोई भूल सका होगा। खौफ ऐसा था कि अपने ही अपनों के शव को लावारिस छोड़ गए। तब उन लावारिस शवों का पुलिस ने दाह संस्कार किया। लेकिन, कोरोना काल से भले हम ऊभर आए हों। पर गरीबी की मार अभी भी ऐसे हालातों को जन्म दे रही है। यूपी की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा ही किस्सा सामने आया है।

जब एक 80 साल की वृद्ध महिला के अस्पताल में दम तोड़ते ही उसका इकलौता बेटा जालंधर निकल गया। बेटे ने पलटकर भी नहीं देखा। तब कृष्णानगर थाने में तैनात एक इंस्पेक्टर ने इस वृद्धा के शव को कंधा देकर अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। इंस्पेक्टर के इस नेक काम में पूरे थाने ने हिस्सा लिया। आइए आपको मिलवाते हैं जाबाज विक्रम सिंह से...

Inspector Vikram Singh

कौन है ये इंस्पेक्टर ?

43 साल के विक्रम सिंह लखनऊ के कृष्णा नगर थाने में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। दबंग इरादों और दिल में करुणा का भाव रखने वाले विक्रम सिंह पुलिस की सेवा करते हुए अब तक 6 जिलों का सफर तय कर चुके हैं। विक्रम सिंह बताते हैं कि पिछले साल यानी 10 अक्टूबर 2022 में कृष्णानगर थाने में ट्रांसफर हुआ है। इससे पहले मैनपुरी में साइबर सेल प्रभारी इंस्पेक्टर रहे।

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    कौन हैं Inspector Vikram Singh? जिन्होंने वृद्ध महिला का दाह संस्कार कर दिलाई कोरोना काल की याद

    उससे पहले बनारस और झांसी में क्राइम ब्रांच में रहे। उससे पहले अयोध्या में एसओ के पद पर सेवाएं दी। वर्तमान में लखनऊ के कृष्णा नगर थाने में तैनात हैं। मुरादाबाद में उनकी ट्रेनिंग हुई है। यह 2001 बैच के सब इंस्पेक्टर हैं। इनके परिवार में मां, पत्नी, दो बेटे(एक 9वीं तो दूसरा 10वीं क्लास) हैं।

    ...तो इसलिए सुर्खियों में विक्रम सिंह?

    दरअसल, हुआ कुछ यूं कि बीती 9 जुलाई को लोकबंधु अस्पताल के जनरल वार्ड में मानकनगर के मेहंदी खेड़ा निवासी बीना (80) को उसके बेटे रामचंद्र ने भर्ती कराया। महिला को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। तबीयत बिगड़ती जा रही थी। 10 जुलाई की दोपहर वृद्धा की अस्पताल में मौत हो गई। इसकी खबर लगते ही बेटा बिना मां का शव लिए ही अस्पताल से भाग गया।

    अस्पताल के स्टाफ ने कृष्णानगर पुलिस को फोन कर सूचना दी। इंस्पेक्टर कृष्णानगर विक्रम सिंह ने पुलिस टीम वृद्धा के घर भेजी। पता चला कि वृद्धा का बेटा घर में ताला बंद कर जालंधर चला गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि एक से डेढ़ माह पहले ही रामचंद्र लखनऊ लौटा था।

    अर्थी को दिया कंधा, फिर किया अंतिम संस्कार

    इंस्पेक्टर कृष्णानगर विक्रम सिंह ने फैसला किया कि वृद्धा के शव को कंधा देकर अंतिम संस्कार करेंगे। 11 जुलाई दोपहर इंस्पेक्टर कृष्णानगर विक्रम सिंह, आजादनगर चौकी प्रभारी अजय यादव और अन्य खाकी साथियों के साथ वृद्धा महिला की अर्थी को कंधा दिया। वीआईपी रोड स्थित श्मशान घाट तक पहुंचाया। उसके बाद अंतिम संस्कार के लिए करीब 5 हजार रुपए का वहन कर इंस्पेक्टर कृष्णानगर विक्रम सिंह ने वृद्धा का अंतिम संस्कार किया।

    जब 'विक्रम' के ट्रांसफर निरस्त होने पर खिल-खिलाई थी झांसी

    दरअसल, बात तब की है, जब विक्रम सिंह झांसी जिले के मऊरानीपुर कब्से में कोतवाली प्रभारी के पद पर तैनात थे। उस दौरान मऊरानीपुर कस्बे में लूट, चोरी, डकैती, असलहा फैक्ट्री, शराब माफिया का बोलबाला था। लेकिन, विक्रम सिंह ने अपने अथक प्रयासों से मऊरानीपुर की कानून व्यवस्था को पटरी पर ला दिया।

    इसी बीच उनके ट्रांसफर की खबर स्थानीय लोगों को लगी। जिसके बाद टेलीफोन की घंटियों से डीएम, विधायक व पुलिस विभाग के आलाधिकारियों के टेबल कांप उठी। सभी ने विक्रम सिंह के ट्रांसफर को निरस्त करने की मांग की, जो रंग लाई।

    'विक्रम' दबंग और दयालु कॉप का कॉम्बो

    दबंग खाकी के पीछे एक भावुक और दयालु व्यक्तित्व भी हो सकता है। विक्रम सिंह, इसका जीता जागता उदाहरण हैं। वृद्धा का अंतिम संस्कार कर विक्रम सिंह ने इंसानियत की मिसाल पेश की। विक्रम सिंह के लिए यह कोई पहली बार नहीं है। वो कई बार ऐसी भावुक परिस्थितियों में नेक काम करते आए हैं। चाहे सर्दियों में कंबल वितरण हो या आश्रमों में बच्चों को जरूरत की चीजों का वितरण। यह सभी उन्हें दबंग और दयालु कॉप का कॉम्बो कहने के लिए पर्याप्त है।

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