IAS Lokesh M कौन? डेटिंस्ट से Noida अथॉरिटी CEO बने, Yuvraj की मौत के बाद हटाए गए-तमाशबीन 4 अफसरों का क्या?
Noida Yuvraj Mehta Death Case: नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। नोएडा अथॉरिटी के सीईओ आईएएस डॉ. लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। मुख्यमंत्री ने घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए एसआईटी गठित करने के आदेश दिए हैं, जो पांच दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपेगी।
युवराज मेहता की मौत निर्माणाधीन साइट पर पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से हुई थी, जहां सुरक्षा उपायों की कमी और रेस्क्यू में देरी का आरोप लगा। इस घटना ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं और अब लोग पूछ रहे हैं कि नोएडा अथॉरिटी के अन्य 4 प्रमुख अफसरों का क्या होगा?

Yuvraj Mehta Death Case: युवराज मेहता की मौत- कैसे हुई घटना और आरोप
27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम में काम करते थे और टाटा यूरेका पार्क (सेक्टर 150) के निवासी थे। शुक्रवार रात काम से घर लौटते समय घने कोहरे के बीच उनकी कार सेक्टर 150 के पास एक निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए 20 फीट गहरे पानी भरे गड्ढे में गिर गई। गड्ढे के आसपास कोई बैरिकेड, रिफ्लेक्टर या वार्निंग साइन नहीं था। पुलिस को जानकारी रात 12:15 बजे मिली, लेकिन शव शनिवार सुबह लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद निकाला जा सका। फायर डिपार्टमेंट, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने ऑपरेशन चलाया।
चश्मदीद डिलीवरी एजेंट मोहिंदर ने आरोप लगाया कि रेस्क्यू में देरी हुई। उन्होंने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई होती तो युवराज को बचाया जा सकता था। ठंड और पानी में लोहे की छड़ों के कारण बचाव दल हिचकिचा रहे थे। युवराज ने डूबते समय पिता को फोन किया और 'पापा, मुझे बचा लो' कहा, लेकिन मदद नहीं पहुंची। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण एंटीमॉर्टम ड्राउनिंग के बाद एस्फिक्सिया और कार्डियक अरेस्ट बताया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि डेवलपर्स (एमजे विशटाउन प्लानर्स लिमिटेड और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन) ने बेसिक सुरक्षा उपाय नहीं किए। निवासियों ने पहले भी इस जगह पर खतरे की शिकायत की थी। पुलिस ने परिवार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की।
Yogi Government Action: सीईओ हटाए गए, एसआईटी गठित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने घटना का संज्ञान लेते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटा दिया। उन्हें वेटिंग में डाल दिया गया है। एसआईटी (मेरठ जोन के एडीजी की अगुवाई में तीन सदस्यीय) गठित की गई है, जो पांच दिनों में रिपोर्ट देगी। नोएडा अथॉरिटी ने जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को बर्खास्त किया और ट्रैफिक से जुड़े अन्य अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया। बारिकेड्स लगाए गए हैं। यह कार्रवाई प्रशासनिक खामियों और लापरवाही पर केंद्रित है।
Who Is IAS Lokesh M: आईएएस लोकेश एम कौन हैं? डेंटिस्ट से आईएएस तक का सफर
डॉ. लोकेश एम 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जिनका कैडर उत्तर प्रदेश है। उनका जन्म 4 अप्रैल 1976 को बेंगलुरु (कर्नाटक) में हुआ। आईएएस बनने से पहले वे डेंटिस्ट थे और बीडीएस डिग्री पूरी की। 2005 में यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम पास करने के बाद उनका करियर शुरू हुआ।
करियर की शुरुआत 2006 में अलीगढ़ में असिस्टेंट मजिस्ट्रेट एंड कलेक्टर से हुई। 2007 में सहारनपुर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बने। 2009 में पहली बार डीएम के रूप में कौशांबी की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद अमरोहा, गाजीपुर, एटा, कुशीनगर, मैनपुरी में डीएम रहे। 2021 में सहारनपुर मंडल आयुक्त बने। नोएडा अथॉरिटी सीईओ से पहले कानपुर मंडल आयुक्त थे। 2023 से नोएडा अथॉरिटी के सीईओ थे। वे अनुशासन और जन शिकायत निवारण के लिए जाने जाते थे। नोएडा ऑफिस में सीसीटीवी लगवाकर स्टाफ पर नजर रखते थे।
Noida Authority के इन 4 अफसर क्या?
घटना में सुरक्षा, ट्रैफिक और मेंटेनेंस से जुड़े विभागों की लापरवाही सामने आई है। लोकेश एम के हटने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि नोएडा अथॉरिटी के इन प्रमुख अफसरों पर क्या कार्रवाई होगी:-
- सिविल जीएम एके अरोड़ा
- सिविल एजीएम विजय रावल
- इलेक्ट्रिकल एंड मेंटेनेंस जीएम आरपी सिंह
- ट्रैफिक सेल जीएम एसपी सिंह
ये अफसर निर्माण, ट्रैफिक मैनेजमेंट और मेंटेनेंस से जुड़े हैं। घटना में गड्ढे के आसपास बैरिकेड न होने और रेस्क्यू में देरी के आरोप इन विभागों पर लगे हैं। एसआईटी जांच में इनकी भूमिका जांचेगी। अगर लापरवाही साबित हुई तो सस्पेंशन, ट्रांसफर या विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
उठते सवाल: तड़पकर मौत की सजा सिर्फ ट्रांसफर?
घटना ने जनता में आक्रोश पैदा किया है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या एक युवा की तड़पकर मौत की कीमत सिर्फ एक आईएएस अधिकारी का ट्रांसफर है? युवराज 90 मिनट तक पानी में तड़पता रहा, लेकिन रेस्क्यू में देरी हुई। तीन विभाग (पुलिस, फायर, अथॉरिटी) तमाशबीन बने रहे। जनता की जान की सुरक्षा के लिए बेसिक उपाय न होने पर क्या सिर्फ एक ट्रांसफर काफी है? एसआईटी रिपोर्ट के बाद और कार्रवाई की उम्मीद है, लेकिन यह मामला उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है, जबकि निवासी बार-बार शिकायतों के बावजूद अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।
(इनपुट-मीडिया सोर्स व मृतक के परिजनों के बयान)
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