क्या है UP की मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना, जानिए शोध छात्र कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ
लखनऊ, 10 अगस्त: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी के पिछड़े ब्लॉकों के विकास के लिए मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना शुरू की है। दरअसल पिछले मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम शुरू करने को अपनी मंजूरी दी थी। इसके तहत राज्य के 100 पिछड़े ब्लॉकों में विकास की गति को कैसे बढ़ाया जाए इस पर फोकस किया जाएगा। इस पर शोध कार्य करने के लिए हर ब्लॉक के लिए एक शोध छात्र की नियुक्ति की जाएगी। दरअसल सरकार का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही कमियों को दूर करने और उनका समाधान निकालने के लिए शोधार्थियोंं का सहारा लिया जाए।

यूपी के आंकाक्षी जिलों में शोध छात्रों की होगी तैनाती
योजना के तहत शोध छात्रों को विभिन्न विकास परियोजनाओं और योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के लिए आकांक्षी ब्लॉकों में काम करने के लिए चुना जाएगा। सरकार 100 ब्लॉक के लिए 100 शोधकर्ताओं का चयन करेगी। वे कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण करेंगे, कार्यान्वयन प्रक्रिया की समीक्षा करेंगे, प्रारंभिक डेटा का विश्लेषण करेंगे, कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में समस्याओं का समाधान ढूंढेंगे, यदि कोई हो। उन साधनों का सुझाव देंगे जिनके माध्यम से लोगों को इन योजनाओं से लाभान्वित किया जा सकता है।

प्रति माह 30000 रुपए सरकार करेगी भुगतान
एक अधिकारी ने कहा कि युवा शोधकर्ताओं की नई दृष्टि और दृष्टिकोण, ऊर्जा और उद्योग के प्रति उनकी रुचि और भविष्य के लिए उनके अनुभवों से राज्य को लाभ होगा। प्रत्येक साथी को एक वर्ष की अवधि के लिए प्रति माह 30,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा, जो एक पूर्णकालिक रोजगार होगा। यात्रा के लिए प्रति माह अतिरिक्त 10,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा, जबकि टैबलेट की खरीद के लिए 15,000 रुपये का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा।

फेलोशिप की अवधि एक साल के लिए बढ़ सकती है
चयनित शोधकर्ताओं को निर्धारित विकास खंड में रहना आवश्यक होगा। फेलोशिप की अवधि को केवल एक वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। शोधकर्ताओं को जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी के अधीन कार्य करना होगा। चयन के लिए सरकार कृषि, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, वन, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, कौशल विकास, ऊर्जा, पर्यटन और संस्कृति, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी के क्षेत्र के छात्रों और शोधकर्ताओं पर विचार करेगी।

शोधकर्ताओं के लिए ये रहेगी योग्यता
चयन के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए, एक उम्मीदवार को एक प्रमुख कॉलेज या विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होना चाहिए या स्नातक में न्यूनतम 60% प्राप्त करना चाहिए। केवल 40 वर्ष या उससे कम आयु वालों पर ही विचार किया जाएगा। इसका लाभ यूपी के सभी विश्वविद्यालयों से जुड़े शोध छात्रों को मिल सकता है। छात्रों के लिए जल्द ही इसके लिए सरकार की ओर से विज्ञापन निकाला जाएगा। सरकार इन शोधार्थियों की मेधा का लाभ उठाकर पिछड़े जिलों का कायाकल्प करना चाहती है।

क्या कहते हैं यूपी सरकार के मंत्री
इस योजना के बारे में यूपी के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि शोधार्थियों की नियुक्ति एक साल के लिए की जाएगी, जिसके दौरान वे अपने-अपने जिलों के जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के अधीन काम करेंगे। शाही ने कहा कि, "इन रिसर्च फेलो का चयन कृषि, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, वन और पर्यावरण, शिक्षा, कौशल विकास, ऊर्जा, पर्यटन और संस्कृति, डेटा विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सार्वजनिक नीति और शासन आदि सहित विभिन्न क्षेत्रों से किया जाएगा। रोजगार विभाग की वेबसाइट पर और देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों या संस्थानों से न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक होगी। उनकी उम्र 40 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।'












Click it and Unblock the Notifications