अनोखी लव स्टोरी: मुस्तफा रखता है करवाचौथ का व्रत, पूनम मनाती है ईद

वाराणसी। धर्म की नगरी काशी सदैव गंगा जमुनी तहजीब की मिशाल पेश करती रही है। यहीं से एक पति-पत्नी की अनोखी प्रेम कहानी सामने आई है हिन्दू पत्नी अपने मुसलमान पति के लिए पिछले 12 वर्षों से करवाचौथ का व्रत रख रही है तो वहीं पति भी रोजा रख पत्नी को पानी पिलाने के बाद ही वह कुछ खाता है। इसी तरह पति-पत्नी मिलकर ईद और करवाचौथ साथ मनाते हैं। इनका प्यार एकता की मिसाल है। इन दोनों के दो बच्चे हैं और बच्चे भी कहते है कि हम ईद बकरीद होली दीपावली सब मनाते हैं।

पिता के इलाज के बीच हुआ दोनों में प्यार

पिता के इलाज के बीच हुआ दोनों में प्यार

ये कहानी जलालीपट्टी डीएलडब्लू रहने वाले रेलवे कर्मचारी मोहम्मद मुस्तफा और पूनम सिंह की है जिन्होंने सभी जाति धर्म की दीवार तोड़कर अपने प्यार को शादी के अंजाम तक पहुंचाया। मुस्तफा ने बताया कि हम दोनों की मुलाकात 2002 में रेलवे हॉस्पिटल में हुई थी। जहां हम दोनों के पिता बीमारी अवस्था में एडमिट थे। दोनों लोगों का अगल-बगल बेड था जिसके कारण हम दोनों काफी समय एक साथ बिताते थे। धीरे-धीरे यह मुलाकात कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला।

2005 में हुई थी शादी

2005 में हुई थी शादी

हम लोग करीब एक महीने हॉस्पिटल में रहे। घर आने बाद हम लोगों की मुलाकतें होती रहीं। यह प्यार का सिलसिला तक़रीबन दो-ढाई साल चला। फिर हमनें सबके विरोध के बावजूद 2005 में कोर्ट शादी कर ली। मैं भी रेलवे कर्माचारी था। शादी के दौरान कोई घर वाला नहीं था करीब का एक दोस्त गवाह बना। शादी के बाद हम लोग तीन दिन मर्णिकणिकाघाट पर एक परिचित पंडित जी के घर रहे ,फिर उन्हीं की सहायता से गिरजाघर चौराहे सम्मान होटल में 3 महीने रहे।

 शादी के खर्च में बिक गई बाईक और गहने

शादी के खर्च में बिक गई बाईक और गहने

यहां के खर्च को देने में हमारी बाइक और पूनम के गहने बिक गए। फिर हमने मोहनीकुंज में एक कमरा लिया, वहां हम 6 महीने रहे। इस तरह धीरे-धीरे दिन बीतने लगा और पिता जी के मृत्यु के बाद हम इस रेलवे क्वाटर में आ गए। अब सब अच्छा है, दो बच्चे भी हैं साहिबा और ईशान। मैं पूनम के हर त्योहार को बहुत ही धूम धाम से मनाता हूं। इस दिन उसे अपने हाथों से सजाता हूं और उसको पानी पिलाने बाद ही मैं कुछ खाता हूं। वो भी हमारे हर त्योहार को मनाती है। उसके दूज चाँद हो ईद का दोनों एक सामान हैं। मैं चाहता हूँ की पूनम सिर्फ इस जन्म ही नहीं बल्कि वो सात हजार जन्मों तक मेरी पत्नी बनी रहे।

जन्म-जमान्तर के लिए बने है दोनों एक दूजे के लिए

जन्म-जमान्तर के लिए बने है दोनों एक दूजे के लिए

मुस्तफा की पत्नी पूनम सिंह कहती है की मैंने अपने प्यार के आगे किसी धर्म और जाती को नहीं देखा न देखना चाहते हैं। जो लोग फतवा जारी करते है और धर्म की राजनीति करते हैं। वो अपनी दुकानदारी चलाते हैं. चाँद करवा या चौथ का, चाँद तो चाँद ही होता है। प्यार से बड़ी कोई चीज नहीं है।

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