Uttar Pradesh Mainpuri by-elections Results 2022: समाजवाद के गढ़ 'मैनपुरी' से खाली हाथ लौटी बीजेपी
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में सपा को शानदार सफलता मिली है। सपा की ओर से डिंपल यादव ने दो लाख से अधिक मतों से बीजेपी को हराया है। बीजेपी मैनपुरी से खाली हाथ ही लौटी है पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।

Uttar Pradesh Mainpuri by-elections Results 2022: उत्तर प्रदेश में पिछले कई चुनावों में लगातार जीत हासिल कर रही बीजेपी के लिए हालांकि मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में खोने के लिए कुछ नहीं था लेकिन जिस तरह से सीएम योगी आदित्यनाथ, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने चुनाव प्रचार किया उससे ऐसी अटकलें लगाईं जा रहीं थीं कि बीजेपी समाजवाद के इस सबसे मजबूत गढ़ में भी कमल खिलाने में कामयाब रहेगी। लेकिन फिलहाल बीजेपी का सपना टूट गया है। बीजेपी के सूत्रों की माने तो बीजेपी चुनाव के आंकड़ों को लेकर आत्ममंथन करेगी और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में नई रणनीति के साथ मैनपुरी में उतरेगी।

मुलायम सिंह यादव के गढ़ में कमल खिलाने में नाकाम
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी जीत के रिकॉर्ड तोड़ रही थी। कुछ दिनों पहले ही रामपुर-आजमगढ़ में हुए लोकसभा उपुचनाव में शानदार जीत हासिल कर सपा को सोचने के लिए मजबूर कर दिया था। बीजेपी को उम्मीद थी कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार की नीतियों की बदौलत कमल खिलाने में कामयाब रहेगी लेकिन मैनपुरी में उसे निराशा हाथ लगी। बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के लिए भी ये बड़ा लक्ष्य था लेकिन वह पहले ही टेस्ट में असफल साबित हो गए।

शिवपाल-अखिलेश की एकजुटता ने फेरा पानी
बीजेपी के एक नेताओं का दावा है कि अखिलेश यादव और शिवपाल की एकजुटता की वजह से ही बीजेपी को मैनपुरी में निराशा हाथ लगी है। बीजेपी को लगा कि शिवपाल के सहारे वह मैनपुरी की वैतरणी पार हो जाएगी लेकिन ऐन वक्त पर शिवपाल के यू टर्न ने सारा पासा ही पलट दिया। बीजेपी को नई रणनीति के साथ मैदान में उतरना पड़ा। बीजेपी का दावा है कि मैनुपरी में बीजेपी ने काफी अच्छा वर्कआउट किया था लेकिन जीत नहीं मिली। अब अगली बार बीजेपी यहां कमल खिलाने का प्रयास करेगी।

योगी आदित्यनाथ- भूपेंद्र चौधरी की रैलियां भी काम नहीं आईं
मैनुपरी में जीत को लेकर बीजेपी इस कदर उतावली थी कि गुजरात और हिमाचल के विधानसभा चुनाव के बाद भी योगी मैनपुरी में लगातार प्रचार कर रहे थे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर सबसे बड़े नेता मैनपुरी में डेरा डाले रहे लेकिन अखिलेश ने इनकी रणनीति को काउंटर कर उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बीजेपी के नेताओं की रैलियां काम नहीं आई और यहां यहां की जनता ने एक बार फिर समाजवाद में अपनी आस्था व्यक्त की थी।

मैनुपरी में जीत के लिए 2024 तक करना होगा इंतजार
राजनीतिक विश्ले@ाकों की माने तो बीजेपी को अब मैनपुरी में कमल खिलाने के लिए 2024 का इंतजार करना होगा। राजनीतिक विश्लेशक कुमार पंकज कहते हैं कि मैनपुरी में सपा को मिली जीत बीजेपी को रास नहीं आएगी। वह इस बार मैनपुरी में कमल खिलाने का दावा तो कर रही थी लेकिन हार और जीत के बीच का अंतर ही यह बताता है कि यहां समाजवाद की जड़ें काफी गहरी हैं और उसे उखाड़ने के लिए अभी बीजेपी को और प्रयास करने होंगे।

आजमगढ़-रामपुर उपचुनाव जीतने के बाद आश्वस्त थी बीजेपी
बीजेपी के नेताओं की माने तो आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा का उपचुनाव जीतने के बाद इस बात को लेकर आश्वस्त थी कि मैनपुरी में भी वह कमल खिलाने में कामयाब रहेगी। बीजेपी ने अपनी रणनीति से ज्यादा शिवपाल पर भरोसा किया। बीजेपी को लगा कि यदि शिवपाल अखिलेश से अलग हो जाते हैं तो वह उनके सहारे ही समाजवाद के सबसे बड़े गढ़ में भी कमल खिलाने में कामयाबी हासिल कर लेगी लेकिन शिवपाल राजनीति के पक्के खिलाड़ी निकले और अपने यू टर्न से उन्होंने बीजेपी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।












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