उत्तर प्रदेश चुनाव: मिलिए प्रियंका गांधी की ‘लेडी ब्रिगेड’ की चार वीरांगनाओं से

नई दिल्ली, 14 जनवरी: प्रियंका गांधी ने अपने तरकश से नायाब तीरों को निकाल कर विरोधी खेमे में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने संघर्षशील महिलाओं को उम्मीदवार बना कर उत्तर विधानसभा चुनाव को महिला सम्मान के मुद्दे से जोड़ दिया है। उम्मीदवारों की पहली सूची से इस बात का संकेत दिया गया है कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ प्रियंका गांधी ही आम आदमी की लड़ाई लड़ सकती हैं। 40 में से अधिकतर महिला उम्मीदवार ऐसी पृष्ठभूमि से जुड़ी हैं जो चुनावी नैरिटव चेंज कर सकती हैं। इनमें चार प्रमुख उम्मीदवारों की चर्चा जरूरी है।

घनघोर निराशा फिर भी ‘आशा'

घनघोर निराशा फिर भी ‘आशा'

उन्नाव सदर से चुनाव लड़ने वाली आशा सिंह ने विपत्तियों का पहाड़ उठा कर जिंदगी का रास्ता बनाया है। उनकी पुत्री के साथ हैवानियत हुई। पति को खोया। बहन और गोतनी भी मौत के मुंह में चली गयीं। लेकिन उन्होंने अपने हौसले और संघर्ष से आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर (अब पूर्व विधायक) को उम्रकैद की सजा दिला कर ही दम लिया। 2017 का उन्नाव रेप कांड इंसानियत के माथे पर कलंक है। इस बर्बर घटना ने भारत की सामाजिक राजनीतिक व्यवस्था को हिला दिया था। योगी आदित्यनाथ सरकार की इस मामले में बहुत फजीहत हुई। 4 जून 2017 को उन्नाव की एक 17 साल की लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। पीड़िता ने अगस्त 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक खुला पत्र लिखा था जिसमें उसने कहा था कि 4 जून 2017 को भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के घर पर उसके साथ रेप हुआ था। वह रोजगार के सिलसिले में मदद के लिए विधायक के घर गयी थी। 11 जून को पीड़िता गायब हो गयी। फिर एक हफ्ते बाद पुलिस ने पीड़िता को ओरैया गांव से बरामद किया। उसे कोर्ट में पेश किया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपी (सेंगर) का नाम लेने नहीं दिया। अगस्त 2017 में इस मामले में दो लोग गिरफ्तार हुए।

खूब लड़ीं और विधायक को सजा दिला कर मानीं

खूब लड़ीं और विधायक को सजा दिला कर मानीं

5 अप्रैल 2018 में पीड़िता के पिता के साथ मारपीट की गयी। आरोप सेंगर के समर्थकों पर लगा। पुलिस ने पीड़िता के पिता को ही गिरफ्तार कर लिया। उन्हें न्यायिक हिरासत में रखा गया। तब 8 अप्रैल को पीड़िता ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के लिए सीएम योगी के आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की। अगले दिन (9 अप्रैल) पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गयी। इसके बाद पूरे देश में खलबली मच गयी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की बात सामने आने पर विधायक के भाई की गिरफ्तारी हुई। 11 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस अमानवीय घटना पर स्वत: संज्ञान लिया और जांच की जिम्मेदारी सीबीआइ को सौंपने का आदेश दिया। 12 अप्रैल 2018 को विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को रेप का आरोपी बनाया गया। अगले दिन विधायक की गिरफ्तारी हुई। 21 नम्बर 2018 को पीड़िता के चाचा को 18 साल पुराने एक केस में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। जुलाई 2019 में पीड़िता अपने वकील, चाची और मौसी के साथ चाचा से मिलने के लिए जेल जा रही थी। इस दौरान एक ट्रक ने पीड़िता की कार को जोरदार टक्कर मारी थी। इस हादसे में उसकी चाची, मौसी की तत्काल मौत हो गयी थी। बाद में घायल वकील की भी मौत हो गयी थी। दिसम्बर 2019 में सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी।

(पूनम पांडेय - शाहजहांपुर सदर विधानसभा सीट)

(पूनम पांडेय - शाहजहांपुर सदर विधानसभा सीट)

नवम्बर 2021 में शाहजहांपुर में सीएम योगी की एक सभा होने वाली थीं। वहां पहले से आशा कार्यकर्ताओं का आंदोलन चल रहा था। वे अपनी नौकरी पक्की करने और मानदेय बढ़ाने की मांग पर डटी हुई थीं। 9 नवम्बर को शाहजहांपुर के खिरनी बाग मैदान में सीएम की सभा होने वाली थी। सभा ढाई बजे प्रस्तावित थी। आशा बहुएं सीएम से मिलने की आस में पहले ही वहां पहुंच गयीं। वहां पुलिस का भारी बंदोबस्त था। वे सीएम से मिलने के लिए सभास्थल तक जाने की मांग करने लगीं। पुलिस ने उन्हें रोक दिया। फिर उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने जो कहर ढाया वह दिल दहला देने वाला था। उन्हें बेरहमी से पीट गया। जूतों से कुचला गया। मीडियाकर्मियों ने जब तस्वीरें लेनी चाही तो उनके मोबाइल और कैमरे छीन लिये गये। इस बीच आशा बहू पूनम पांडेय पुलिस वालों के शिकंजे में फंस गयी। पूनम पर इतनी लाठियां बरसायीं गयीं कि उनका हाथ टूट गया। गर्दन पर गहरी चोट लगी। मारपीट का यह वीडियो वायरल हुआ तो कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आशा बहुओं को न्याय दिलाने की मांग की थी। इस घटना के दो दिन बाद पूनम पांडेय और अन्य आशा बहुएं प्रियंका गांधी से मिलने लखनऊ गयीं। प्रियंका गांधी ने लखनऊ स्थित अपने घर के बड़े मैदान में उन्हें बैठाया। प्रियंका ने पूनम पांडेय को अपने पास बैठा कर उनसे बातचीत की। उनके जख्मों को देखा। उनका इलाज कराया। न्याय दिलाने का भरोसा दिया। प्रियंका गांधी ने उस समय पूनम पांडेय के साहस और संघर्ष की बहुत सराहना की थी। इस घटना के दो महीने बाद पूनम चुनाव के मैदान में हैं।

साड़ी खींची, हाथापाई की और हाथ से पर्चा छीन लिया

साड़ी खींची, हाथापाई की और हाथ से पर्चा छीन लिया

( रितु सिंह - महम्मदी विधानसभा सीट)
जिला - लखीमपुर खीरी । पसंगवा प्रखंड में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव होना था। 9 जुलाई 2021 को नामांकन की आखिरी तारीख थी। सपा प्रत्याशी रितु सिंह ब्लॉक प्रमुख पद के नॉमिनेशन के लिए आयीं थीं। जब रितु सिंह नामांकन का पर्चा लेकर आगे बढ़ी तो उनके साथ अभद्रता की गयी। आरोप है कि उनकी साड़ी खींच दी गयी। उन्हें दौड़ा कर पीटा गया। बंधक बनाने की कोशिश की गयी। आरोप लगा भाजपा के नेताओं पर। वे नामांकन नहीं कर सकीं। इस मामले में पुलिस ने भाजपा की धौरहरा सांसद रेखा वर्मा के दो रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने छेड़छाड़, मारपीट और लूट की प्राथमिकी दर्ज की थी। दिनदहाड़े सरकारी दफ्तर के बाहर एक महिला के साथ इस शर्मनाक घटना ने योगी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिया था। सत्ता पक्ष से जुड़े लोग महिलाओं पर लगातार जुल्म ढा रहे थे। इस घटना का भी वीडियो वायरल हुआ था। प्रियंका गांधी ने इस बदसलूकी पर तुरंत ट्वीट किया था, "कानून व्यवस्था की आंख पर पट्टी बांध कर लोकतंत्र का चीरहरण हो रहा है।" रितु सिंह सपा की उम्मीदवार थीं। लेकिन नारी प्रतिष्ठा हनन को मुद्दा बना कर प्रियंका गांधी रितु से मिलने लखीमपुर खीरी गयीं थीं। इसके बाद रितु सिंह सपा से कांग्रेस में शामिल हो गयीं। अब महम्मदी विधानसभा सीट से कांगेरेस की उम्मीदवार हैं।

सदफ जाफर: दंगे के समय कर रहीं थीं फेसबुक लाइव

सदफ जाफर: दंगे के समय कर रहीं थीं फेसबुक लाइव

(सदफ जाफर, लखनऊ मध्य विधानसभा सीट) -19 दिसम्बर 2020, स्थान लखनऊ। सीएए के खिलाफ आंदोलन चल रहा था। आंदोलनकारी परिवर्तन चौक पहुंचे थे। अचानक रोड़ेबाजी शुरु हो गयी। फिर देखते देखते उपद्रव शुरू हो गया। कई लोगों की गाड़ियां आग के हवाले कर दी गयीं। पुलिसवालों की जीप भी। फिर अलग-अलग इलाकों से दंगे-फसाद की खबर आने लगी। जिस समय हिंसा की खबरें आ रही थीं उस समय लखनऊ की सदफ जाफर फेसबुक लाइव कर रहीं थीं। फेसबुक लाइव में दिख रहा था कि सदफ पुलिसवालों के साथ चलते हुए अपनी बात कह रहीं थीं। वे दंगाई को पुलिस हिरासत में लेने की भी अपील कर रहीं थीं। सदफ जब फेसबुक लाइव कर रहीं थी उस वक्त परिवर्तन चौक पर दंगाई रोड़ेबाजी कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने अन्य लोगों के साथ सदफ जाफर को गिरफ्तार कर लिया। वे 19 दिन जेल में रहीं। उनके खिलाफ दंगा करने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ था। सदफ ने आरोप लगाया था कि जेल में उनके बाल खींचे गये थे, पेट पर लात मारी गयी थी। बच्चों और मातापिता से मिलने नहीं दिया गया था। करीब 10 दिन बाद प्रियंका गांधी जब सदफ के परिजनों से भेंट करने गयीं तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। सदफ जाफर सिंगल मदर हैं। उनकी बड़ी बेटी करीब 17 साल की है। बेटा 11 साल का है। अब वे लखनऊ मध्य से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं।

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