उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव: महिलाओं के जरिये चुनावी बरकत की उम्मीद में सियासी दल
लखनऊ, 01 दिसंबर। "औरत के हाथ में बड़ी बरक्कत होती है।" कथा सम्राट प्रेमचंद ने अपनी कालजयी रचना 'गोदान' में यह पंक्ति लिखी है। अब भारत के राजनेता भी मानने लगे हैं कि उनकी सियासी बरक्कत औरत के हाथ में ही है।

पंजाब, उत्तर प्रदेश के चुनाव में वोट के लिए नेता खुद को औरत का हमदर्द साबित करने के लिए होड़ कर रहे हैं। पंजाब में अरविंद केजरीवाल, उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी और योगी आदित्यनाथ इस होड़ में शामिल हैं।

चुनावी राजनीति में ‘गोदान’ का प्रसंग
'गोदान' उपान्यास में कई पात्र हैं। गोबर और अलादीन भी इनमें प्रमुख हैं। दोंनों में घर-गृहस्थी की बात हो रही है। अलादीन एक प्रसंग के दौरान गोबर से कहता है, औरत के हाथ में बड़ी बरक्कत होती है। गोदान हिंदी साहित्य की अनमोल रचना है । इसका प्रकाशन 1936 में हुआ था। प्रेमचंद ने करीब आठ दशक पहले जो बात लिखी उसका सामाजिक-राजनीतिक महत्व अब जा कर सामने आ रहा है। खास कर विधानसभा चुनावों में। सियासी बरक्कत में औरतों की अहमियत को सबसे पहले नीतीश कुमार ने 2006 में समझा था। इसका सुखद परिणाम निकला। 2020 में जब नीतीश की नैया मझधार में डगमगा रही थी तब औरतों ने ही अपने दम पर उसे पार लगाया। 2022 में जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं उनमें कम से कम दो राज्यों (उत्तर प्रदेश, पंजाब) की राजनीति 'महिला शक्ति' के इर्द-गिर्द घूम रही है।

जब योगी अचानक महिला सिपाही के बच्चे को पुचकारने लगे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लखनऊ से गोरखपुर आये। वे शाम को गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। गोशाला की तरफ जा ही रहे थे कि उनकी नजर एक महिला सिपाही पर पड़ी। वह अपने छोटे बच्चे के साथ ड्यूटी कर रही थी। वे अचानक रूक गये तो साथ चल रहे अफसर और सुरक्षाकर्मी समझ नहीं पाये। योगी उस महिला सिपाही के पास पहुंचे। उसके छोटे बच्चे को लाड़-प्यार से पुचकारा। फिर उन्होंने गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को फोन लगाने को कहा। जब पुलिस अफसर लाइन पर आये तो उन्होंने पूछा, रात में महिला सिपाही की ड्यूटी क्यों लगायी ? उसके पास एक छोटा बच्चा भी है ? तब अफसर ने कहा कि महिला कांस्टेबल की ड्यूटी रात दस बजे तक ही है। फिर मुख्यमंत्री ने कहा, ठीक है, आगे से महिला सिपाहियों को दिन में जिम्मेवारी दीजिए। योगी आदित्यनाथ ने ऐसा कर के कई लोगों का दिल जीत लिया। कुछ लोग इस बर्ताव में राजनीति भी तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि जब से प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में महिला कार्ड खेला है तब से भाजपा पर भी एक दबाव है। प्रियंका उन्नांव, हाथरस जैसा घटनाओं को उछाल कर योगी सरकार को घेर रही हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के लिए जरूरी है कि वे खुद को महिला हितैषी के रूप स्थापित करें।

प्रियंका उतारेंगी 160 महिला उम्मीदवार !
घोषणा के मुताबिक प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देंगी। उन्होंने अकेल चुनाव लड़ने की बात कही है। यानी कांग्रेस सभी 403 सीटों पर लड़ेगी। ऐसी स्थिति में प्रियंका गांधी को 160 महिला उम्मीदवार उतारने पड़ेंगे। इसके अलावा उन्होंने बीए पास लड़की को स्कूटी और इंटर पास लड़की को स्मार्ट फोन देने का वायदा किया है। क्या इन घोषणाओं से कांग्रेस को महिलाओं का एक मुश्त वोट मिल सकेगा ? इस मामले में राजनीतिक जानकारों की दो राय है। कुछ लोगों का कहना है कि कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। अगर प्रियंका गांधी ने अपनी सौम्य और जुझारू छवि से महिलाओं का मन मोह लिया तो इस चुनाव का नतीजा चौंकाने वाला हो सकता है। हाथरस, उन्नाव, सोनभद्र और लखीमपुरी खीरी की घटना के बाद प्रियंका गांधी ने एक संघर्षशील नेता की छवि बनायी है। उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। दूसरी तरफ कुछ जानकारों का कहना है कि प्रियंका गांधी 160 वैसी महिला उम्मीदवार कहां से लाएंगी जिनका मजबूत राजनीतिक जनाधार हो। कांग्रेस के पास तो पहले से नेताओं का टोटा है। उन्होंने सिर्फ चर्चा में आने के लिए ये घोषणा की है।

“पंजाब में एक हजार रुपये का लॉलीपॉप”
आम आदिमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में हर महिला को हर महीने एक हजार रुपये देने की घोषणा की है। पंजाब में आप की बिखरी हुई राजनीति को जमाने के लिए केजरीवाल ने यह बड़ा दांव खेला है। केजरीवाल के इस दांव से कांग्रेस और अकाली दल में खलबली है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने केजरीवाल की इस घोषणा को छलावा बताया है। सिद्धू के मुताबिक, केजरीवाल जी की यह घोषणा एक 'हजार का लॉलीपॉप' है। महिला सशक्तिकरण का मतलब उन्हें आर्थिक और राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाना है। महिलाओं की बात करने वाले केजरीवाल जी की कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं है। दूसरी तरफ सुखबीर बादल ने कहा है, जिस नेता ने दिल्ली की महिलाओं को 100 रुपये भी नहीं दिये वह पंजाब की महिलाओं को 1000 रुपये देने की बात कह रहा है। उनकी तो दिल्ली में सरकार है। पहले वे दिल्ली में हर महिला को प्रति महीने एक हजार रुपये दे कर दिखाएं कि यह कैसे मुमकिन है। तर्क-वितर्क की चाहे जो परिणति हो, लेकिन आज के दौर में आधी आबादी राजनीति का मुख्य केन्द्र बन चुकी है। यानी जो स्त्री कल तक घर की धुरी थी आज वह राजनीति की धुरी बन गयी है।
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