Uttar Pradesh: 2024 से पहले सभी दलों के लिए "लिटमस टेस्ट" साबित होगा नगर निगम चुनाव
लखनऊ, 05 सितंबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद बीजेपी पूरी तरह से अब नगर निगम के चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। नगर निगम के चुनाव सभी दलों के लिए 2024 से पहले उनकी तैयारियों को परखने का एक बेहतर प्लेटफार्म साबित होंगे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीजेपी के नए चीफ ने कहा है कि नगर निगम के चुनाव में बीजेपी शत प्रतिशत सीटें जीतेगी। इसके लिए उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वन किया है। हालांकि बीजेपी के अलावा सभी राजनीतिक दलों ने अभी से नगर निगम चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं दूसरी ओर बीजेपी के अलावा भी सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

2024 से पहले निगम चुनाव पर बीजेपी का फोकस
नगर निगम चुनाव को लेकर बीजेपी ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा की योजना है कि निकाय चुनाव में जीत के लिए हर जिले का प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किया जाए। वहीं विपक्ष पर भी आरोप लगे हैं। अधिकांश विपक्षी दलों ने भाजपा की चुनावी बाजीगरी को तोड़ने के लिए अपनी संगठनात्मक शक्ति को पुनर्जीवित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। नगर निगम चुनाव को बीजेपी सेमीफाइनल के तौर पर लेकर चल रही है।

जयंत के सहयोग से सपा भी तैयारियों में जुटी
वहीं दूसरी ओर देखें तो समाजवादी पार्टी के सहयोगी जयंत चौधरी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक दल का है, जिन्होंने बूथ स्तर की समितियों के पुनर्गठन और विभिन्न सीटों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है, मुख्य रूप से पश्चिमी यूपी क्षेत्र में। यह आरएलडी द्वारा सदस्यता अभियान शुरू करने के कुछ दिनों बाद आया है।रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने बताया कि पार्टी को जमीनी स्तर पर अपनी ताकत बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि यह न केवल नागरिक चुनावों में बल्कि लोकसभा चुनावों में भी समग्र चुनावी प्रदर्शन में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

सपा ने निगम के लिए बनाए थे पर्यवेक्षक
वहीं दूसरी ओर सपा ने भी विभिन्न जिलों के लिए पार्टी के 36 विधायकों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है। साथ ही निकाय चुनावों के लिए संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने की कवायद शुरू कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि सपा सभी नगर निकायों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करेगी ताकि खुद को भगवा पंथ के सामने एक प्रमुख विपक्षी ताकत के रूप में पेश किया जा सके। सूत्रों ने कहा कि सपा नगर निकाय चुनावों भाजपा की रणनीति को मात देने के लिए अपने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।

कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में जुटी बसपा
बसपा को स्थानीय निकाय चुनावों में अपने खोए हुए राजनीतिक क्षेत्र को फिर से हासिल करने में जुट गई है। हाल ही में सम्पन्न हुए यूपी चुनावों में बसपा का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था। नगर निगम के चुनाव के बहाने बसपा अपने कैडर के मनोबल को मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी कुछ पूर्व विधायकों को यूएलबी में उतारने पर भी विचार कर रही है। 2017 के निकाय चुनावों में, बसपा ने दो नगर निगम सीटें - अलीगढ़ और मेरठ - जीतने में कामयाबी हासिल की थी। बाद में 2019 के लोकसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन करके 10 सीटें जीती थीं।

कांग्रेस के लिए निगम के चुनाव बड़ी चुनौती
कांग्रेस भी नगर निकाय चुनावों को खुद को फिर से जीवित करने के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर ले रही है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों ने कहा कि नगर निगम चुनाव को लेकर अब तक चार दौर की बैठकें हो चुकी हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि निकाय चुनाव की तैयारियों की निगरानी के लिए एआईसीसी के छह महासचिवों को लगाया गया है। यूपीसीसी महासचिव द्विजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि वे निकाय चुनावों में हर संभव प्रयास करेंगे।

यूपी में शरद पवार की पार्टी भी आजमाएगी किस्मत
उत्तर प्रदेश में करारी हार के बाद समाजवादी पार्टी ने अब नगर निकाय के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं बीजेपी की धुर विरोधी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) भी अब पहली बार यूपी में नगर निकाय के चुनाव में उतरेगी। हालांकि एनसीपी यूपी में पहले विधानसभा चुनाव में अपना हाथ आजमा चुकी है लेकिन उसे खास सफलता नहीं मिली थी लेकिन अब उसने निकाय चुनाव में बीजेपी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है।












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