क्यों UP में 1 साल से कम के समय में IPS अधिकारियों का हो जाता है ट्रांसफर?
उत्तर प्रदेश में IPS अधिकारियों का ट्रांसफर बड़ी संख्या में होता है। इस बारे में यूपी के पूर्व DGP ने बताया है कि ऐसा क्यों होता है?
लखनऊ। बीते 10 साल (2006 से 2015 ) के भीतर उत्तर प्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों का सबसे ज्यादा ट्रांसफर हुए हैं। यह जानकारी ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) की ओर से जारी किए गए आंकड़ो से सामने आई है।

जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक 37 फीसदी ट्रांसफर के मामले इन 10 सालों में कम हुए, फिर भी एक IPS अधिकारी 1 साल से अपने पद पर टिक पाता है।
2007 से 2015 तक के आंकड़ों के मुताबिक देश भर के IPS कैडेर के 11 फीसदी जो यूपी से हैं, उनका 2,251 बार ट्रासंफर हुआ। वहीं बात पूरे देश की करें तो 5,169 बार IPS अधिकारियों के स्थानांतरण हुए हैं। IPS अधिकारियों का ट्रांसफर करने के मामले में यूपी के बाद तमिलनाडु का नंबर है। यहां इन 10 सालों में 453 बार IPS अधिकारियों का स्थानातंरण हुआ है।
बीते साल जनवरी 2016 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 80 IPS अधिकारियों के ट्रांसफर किए थे, इसमें इस्पेंक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) भी शामिल थे। इसके बाद फरवरी 2016 में ही 12 जिलों में तैनात 50 IPS अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए थे। इनमें वो IPS अधिकारी भी शामिल रहे जो जिनका स्थानांतरण जनवरी में किया गया था।
2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार आने पर 100 IPS अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए थे हालांकि ऐसे स्थानातंरण प्रशासनिक खतरों के रूप में जाने जाते हैं। कोई भी अन्य दल जो सत्ता में आता है यही करता है। साल 2007 से 2011 के बीच जब यूपी में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी,, 134 ऐसे ट्रांसफर किए गए जिनकी पोस्टिंग को 1 साल से कम हुआ था। BPRD के आंकड़ों के अनुसार 200 ट्रांसफर ऐसे हुए जिनकी पोस्टिंग को 1-2 साल हुआ था। अगर बात हर साल के औसत की करें तो यह 261 तक पहुंच जाता है।
वहीं बात सपा सरकार की करें तो यहां 2012 से 2015 के बीच 139 ऐसे ट्रांसफर किए गए जिनकी पोस्टिंग को 1 साल हुई थी, 23 ऐसे ट्रांसफर थे, जिनकी पोस्ट 1-2 साल की हुई थई वहीं हर साल का औसत 163 ट्रांसफर था।
IPS अधिकारियों के भारी भरकम ट्रांसफरों पर उत्तर प्रदेश के पूर्व डॉयरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) विक्रम सिंह ने कहा कि सत्ताधारी दल की ओर से राजनीतिक दबाव इसका बड़ा कारण है। सिंह ने कहा कि सत्ताधारी दल के नेताओं की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों को ट्रांसफर के लिए फोन आना आम बात है। तुरत-फुरत में अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण खतरनाक आपराधिक तत्वों को खुला मैदान मिल जाता है। इससे पुलिसिंग में काफी दिक्कत आती है।
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