UP Politics: बीजेपी की स्नेह यात्रा पर लगा ब्रेक, आप भी जानिए इसकी वजह
2024 से पहले पसमांदा समाज के बीच जारुकता फैलाने के लिए शुरू की जा रही बीजेपी की स्नेह यात्रा पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।
Bhartiya Jnata Party: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा गुरुवार (27 जुलाई) को शुरू की जाने वाली पसमांदा स्नेह यात्रा स्थगित कर दी गई। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा की पूर्व व्यस्तताओं और 29 जुलाई को पड़ने वाले मोहर्रम के 10वें दिन आशूरा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।

27 जुलाई से शुरू होनी थी स्नेह यात्रा
भाजपा की पसमांदा स्नेह यात्रा को गाजियाबाद से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करना था और राज्य के पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों के मुस्लिम बहुल जिलों से गुजरना था। उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि यात्रा की नई तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी।
अब्दुल कलाम को भुनाने की थी कोशिश
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की आठवीं पुण्य तिथि (गुरुवार को) पर दिल्ली में पार्टी मुख्यालय से नड्डा को यात्रा को हरी झंडी दिखानी थी। भाजपा की योजना 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पसमांदा (पिछड़े) मुस्लिम समुदाय को लुभाने की है।
समान नागरिक संहिता के भ्रम को दूर करने की कोशिश
एक भाजपा नेता ने कहा कि, मुस्लिम समुदाय तक पहुंचने लिए भाजपा ने सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने का निर्णय लिया है। पार्टी यात्रा के दौरान समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच भ्रम दूर करने की भी योजना बना रही है।''
एक दर्जन राज्यों से होकर गुजरनी थी यात्रा
यात्रा को करीब एक दर्जन राज्यों से होकर गुजरना था। इसे गाजियाबाद से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करना था और राज्य के पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों के मुस्लिम बहुल जिलों से गुजरना था।
पसमांदा समाज को बीजेपी से जोड़ने की कवायद
बीजेपी 27 जुलाई से स्नेह यात्रा की शुरुआत करने वाली थी जिसका मकसद पसमांदा समाज को बीजेपी से जोड़ना है। बीजेपी के नेताओं की माने तो पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पूण्यतिथि पर यूपी के गाजियाबाद जिले से 27 मई को इस यात्रा की शुरुआत होगी और उनके जन्मदिन 15 अक्टूबर को समाप्त होनी थी।
2024 से पहले बीजेपी चलाएगी बड़ा अभियान
बीजेपी के नेताओं की माने तो इस यात्रा के माध्यम से पसमांदा समाज में यूनिफार्म सिविल कोड के बारे में भी बताया जाएगा और इसको लेकर इस समाज में जागरुकता फैलाने का काम किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बीजेपी 2024 से पहले पसमांदा समाज को बीजेपी से जोड़ना चाहती है क्योंकि सपा के मुखिया अखिलेश यादव भी पूरी ताकत के साथ अपने अभियान में जुटे हुए हैं।












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