UP: 2024 से पहले दलित कनेक्ट की क़वायद, State Guest House कांड को फिर ज़िंदा करेगी BJP
यूपी की सियासत में दलित वोट बैंक की काफी अहमियत है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सपा के चीफ अखिलेश यादव कांशीराम की मूर्ति का अनावरण कर रहे हैं तो बीजेपी स्टेट गेस्ट हाउस कांड के बारे में दलितों को बता रही है।

Politics on Ambedkar Jayanti in up: उत्तर प्रदेश में दलितों को साधने की कवायद में समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच तगड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। दोनों ही पार्टियां दलितों से कनेक्ट होने के मकसद से अपने कार्यक्रमों में दलित महापुरुषों को भी शामिल कर रहे हैं। बीजेपी के सूत्रों की माने तो 14 अप्रैल को कांशीराम जयंती के मौके पर 20 दिन का एक अभियान चलाएगी जिसके तहत वो दलितों को बताएगी कि कैसे State Guest House कांड के दौरान बीजेपी नेताओं ने बसपा मुखिया मायावती को बचाया था।
दलितों को स्टेट गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाएगी बीजेपी
बीजेपी के एक पदाधिकारी कहते हैं कि बीजेपी अब दलितों तक पहुंचने की योजना बना रही है और उन्हें कुख्यात स्टेट गेस्ट हाउस हमले की याद दिला रही है कि कैसे बीजेपी नेताओं ने बसपा प्रमुख मायावती को सपा की भीड़ से बचाया था। कुछ दिनों पहले ही बीजेपी के नेताओं ने कांशीराम को एक जननायक बताया था और कहा था कि भारतीय राजनीति में उनका काफी योगदान रहा है। यह भी बीजेपी की एक रणनीति का ही हिस्सा था। इस दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीटर हैंडल से उनकी काफी सराहना की थी।

पूरे प्रदेश में बीजेपी करेगी कार्यक्रम
बीजेपी के पदाधिकारियों की माने तो 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती से 20 दिवसीय अभियान के हिस्से के रूप में भाजपा द्वारा नियोजित कार्यशालाओं के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख विषयों में से एक होगी। बीजेपी के इस अभियान को लेकर यूपी बीजेपी एससी एवं एसटी विंग के प्रमुख राम चंद्र कन्नौजिया ने कहा कि, फर्रुखाबाद के तत्कालीन बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी जैसे बीजेपी नेताओं की भूमिका पर चर्चा की जाएगी, जिन्होंने मायावती को नाराज सपा कार्यकर्ताओं से बचाया था। 14 अप्रैल से पांच मई तक पूरे यूपी में एक अभियान चलाया जाएगा।

अखिलेश ने रायबरेली में कांशीराम की प्रतिमा का किया अनावरण
दरअसल रायबरेली में सोमवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा कांशीराम की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद स्टेट गेस्ट हाउस की घटना पर भाजपा का ध्यान केंद्रित हो गया है। रविवार को मायावती ने कहा था कि अगर गेस्ट हाउस की घटना नहीं होती तो सपा-बसपा गठबंधन जारी रहता। सीएम योगी आदित्यनाथ और यूपी बीजेपी प्रमुख भूपेंद्र चौधरी सहित बीजेपी नेताओं ने पिछले महीने ही कांशीराम को यूपी की राजनीति में दलितों को एक प्रमुख ताकत बनाने का श्रेय दिया था।
सपा-बीजेपी के बीच चल रही दलितों को साधने की होड़
कांशीराम को महिमामंडित करने के लिए भाजपा और सपा के बीच एक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो इसके पीछे कई वजहें हैं। पहली वजह ये है कि यूपी की राजनीतिक जमीन पर उनकी महत्वपूर्ण चुनावी भूमिका है। दूसरा ये है कि यदि बसपा के वोटरों का एक वर्ग मायावती को छोड़कर दूसरी पार्टी की तरफ रुख करना चाहता है तो बीजेपी उसके लिए एक मजबूत विकल्प बने ताकि बीजेपी को इसका लाभ मिल सके।

सपा-बीजेपी ने एक दूसरे पर लगाया आरोप
भाजपा नेता कन्नौजिया ने सपा पर दलित नेताओं के नाम पर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अखिलेश को जवाब देना चाहिए कि उनकी सरकार के दौरान आरक्षण क्यों खत्म किया गया। सपा शासन के दौरान दलितों को उनके अधिकारों से वंचित किया गया था। हालांकि, सपा प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी दलितों के मुद्दों का समर्थन कर रही है। हम सामाजिक रूप से उत्पीड़ित से संबंधित मुद्दों को उठाते रहे हैं। सपा ने अपनी दलित पहुंच को मजबूत करने के लिए अंबेडकर वाहिनी का गठन किया है।












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