Panchayat Election: 504 पंचायतें घटीं, अब 36 जिलों में नए परिसीमन के तहत बदलेगा पंचायत चुनाव का पूरा नक्शा
UP Panchayat Election 2025: उत्तर प्रदेश की सियासी फिज़ा में अब बदलाव की बयार चल पड़ी है। राज्य में होने वाले अगले पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी प्रशासनिक हलचल देखने को मिल रही है। इस बार ग्राम पंचायतों की संख्या घटा दी गई है, जिससे चुनावी मैदान का नक्शा भी बदलने वाला है।
पंचायती राज विभाग की हालिया अधिसूचना के मुताबिक अब प्रदेश में कुल 57,695 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराए जाएंगे, जबकि पिछली बार 58,199 पंचायतों में वोटिंग हुई थी। यानी इस बार 504 पंचायतें कम हो गई हैं। यह कटौती शहरी सीमा के विस्तार और पुनर्गठन के चलते की गई है।

चुनाव की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। विभाग अब वार्ड परिसीमन, क्षेत्र पंचायतों के पुनर्गठन और मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे अहम कामों में जुट गया है। इस बार ग्राम पंचायत प्रधानों के अलावा 826 ब्लॉक प्रमुख और 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का भी चुनाव होना है।
कौन-कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
राज्य के करीब 36 जिलों में ग्राम पंचायतों की संख्या में कटौती हुई है। देवरिया जिले में सबसे ज्यादा 64 ग्राम पंचायतें घटी हैं। इसके बाद आजमगढ़ में 47, प्रतापगढ़ में 45, अमरोहा और गोरखपुर में 21-21, गाजियाबाद में 19 और फतेहपुर में 18 पंचायतें कम हुई हैं।
इसके अलावा अलीगढ़ में 16 और फर्रुखाबाद में 14 पंचायतों को घटा दिया गया है। शहरी क्षेत्रों के विस्तार की वजह से ये पंचायतें शहर की सीमा में समाहित हो गईं, जिससे अब इनके नाम पंचायती नक्शे से हट चुके हैं।
वार्डों और क्षेत्र पंचायतों की भी बदलेगी तस्वीर
जब पंचायतों का दायरा घटता है तो आसपास के बचे हुए गांव या 'मजरे' दूसरी पंचायतों में शामिल किए जाते हैं। यही प्रक्रिया अब चल रही है। इससे न केवल ग्राम पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी बल्कि वार्डों की संख्या और उनकी संरचना में भी बदलाव आएगा।
वार्डों के बदलने से क्षेत्र पंचायत की गणित में भी उलटफेर होगा। इसका असर स्थानीय प्रतिनिधित्व और विकास कार्यों के संतुलन पर पड़ सकता है। फिलहाल विभाग इस नई संरचना को अंतिम रूप देने में जुटा है ताकि चुनाव समय से संपन्न हो सकें।
सीधे जनता से चुनाव की तैयारी
एक और बड़ी संभावित योजना पर विचार चल रहा है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मांग की है कि ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का चुनाव भी सीधे जनता से कराया जाए।
अभी इन पदों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए जनप्रतिनिधि वोट डालते हैं। लेकिन अगर केंद्र सरकार से मंजूरी मिलती है, तो ये चुनाव सीधे वोटिंग के जरिए जनता खुद करेगी। इससे ग्राम स्तर पर लोकतंत्र की पकड़ और मजबूत हो सकती है।
पंचायत चुनाव हमेशा से ही राज्य की राजनीति का मूल आधार रहे हैं। ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत तक की यह चुनावी सीढ़ी, सत्ताधारी दलों के लिए जमीनी पकड़ बनाने का मौका होती है।












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