UP Nikay Chunav Result 2023: निकाय चुनाव में प्रयोग के मूड में दिखा UP का मुस्लिम मतदाता?
UP Nikay Chunav Result 2023: यूपी निकाय चुनाव में इस बार मतदान का अलग ट्रैंड दिखा है। यूपी निकाय चुनाव में इस बार मुस्लिम मतदाताओं ने अलग अलग जगहों पर अलग अलग मतदान किया।

17 municipal corporations in UP: उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए निकाय चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने जिस तरह से मतदान किया है उसने राजनीतिक पंडियों को चौंका दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो इस बार मुस्लिम समुदाय ने विवेक का इस्तेमाल किया न कि किसी खास पार्टी को वोट देने के बजाय जैसा कि पहले करते थे। यह पैटर्न राजनीतिक दलों को संदेश देता है कि अब मुस्लिम वोटों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
प्रयोग के मूड में दिखा यूपी की मुस्लिम मतदाता?
सेंटर फॉर ऑब्जेक्टिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट, लखनऊ के निदेशक अतहर हुसैन ने कहा कि, "मैं कहूंगा कि मुसलमान प्रयोग करने के मोड में हैं। मस्लिम मतदाताओं ने पारंपरिक तरीके से बाहर आकर इस बार मतदान किया है। " यूपी में पहली बार बीजेपी गठबंधन के पास अपना पहला मुस्लिम विधायक भी है। अपना दल (सोनेलाल) के उम्मीदवार शफीक अहमद अंसारी ने 50% से अधिक मत प्राप्त किए और स्वार में विधानसभा उपचुनाव जीता। समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस सीट से अनुराधा चौहान को उतारा था।
कहीं बसपा तो कहीं सपा के लिए की टैक्टिकल वोटिंग
वहीं दूसरी ओर गौर करें तो इस समुदाय ने मेरठ मेयर के चुनाव में AIMIM के मोहम्मद अनस का साथ दिया क्योंकि वह उपविजेता रहे। सपा ने वरिष्ठ नेता अतुल प्रधान की पत्नी को ऐसी सीट से टिकट दिया था जहां ओबीसी मुस्लिमों की संख्या अच्छी खासी है। लेकिन मुस्लिम का झुकाव सपा की बजाए एआईएमआईएम की तरफ हो गया।
सहारनपुर में सपा को खारिज किया तो लखनऊ में अपनाया
इसी तरह, मुस्लिम समुदाय ने सहारनपुर में सपा उम्मीदवार आशु मलिक को बाहरी बताते हुए खारिज कर दिया और बसपा का समर्थन किया। इसके ठीक उलट आगरा में बसपा और लखनऊ में समाजवादी पार्टी को मुस्लिम समुदाय ने वोट दिया।
अयोध्या में दिखा कांग्रेस की तरफ झुकाव
मुरादाबाद, झांसी और अयोध्या की मेयर सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की तरफ देखा गया। कानपुर में वोटिंग पैटर्न से पता चलता है कि मुस्लिम कांग्रेस और सपा के बीच बंटे हुए थे। हालांकि, वे सपा के साथ गए जो दूसरे स्थान पर रही और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। दोनों पार्टियों ने 20% ब्राह्मणों और 18% मुसलमानों वाली सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे थे।
पहले कभी नहीं दिखा इस तरह ट्रेंड
अतहर कहते हैं कि मुसलमानों ने लंबे समय के बाद मतदान में अपने विवेक का इस्तेमाल किया। 90 के दशक के बाद से एक महत्वपूर्ण ट्रेंड है। इससे पहले वो कभी भी अपनी पसंद को स्थानीय समीकरणों के साथ जोड़कर विभिन्न पार्टियों के पास नहीं गए। मुस्लिम मतदाताओं में एक उदासीनता भी देखी गई जिसको लेकर सभी राजनीतिक दलों को सोचने की जरूरत है।
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